ममता बनर्जी के खेमे में लौटे कासिम सिद्दीकी, बोले- कई बागी विधायक लौटना चाहते हैं

HIGHLIGHTS
- ममता बनर्जी से मुलाकात करने उनके आवास पहुंचे कासिम सिद्दीकी
- कासिम खुद कुछ समय पहले बागी गुट में शामिल हुए थे
- उन्होंने कहा, धीरे-धीरे सामने आ रही है ऋतब्रत बनर्जी की सच्चाई
तृणमूल कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच विधायक मोहम्मद कासिम सिद्दीकी ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल कई विधायक वापस लौटना चाहते हैं। कासिम सिद्दीकी सोमवार को तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी से मुलाकात करने उनके आवास पहुंचे। वह खुद कुछ समय पहले ऋतब्रत बनर्जी के साथ चले गए थे, लेकिन अब दोबारा ममता बनर्जी के खेमे में लौट आए हैं।
कासिम सिद्दीकी ने क्या कहा?
पूर्व सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात से पहले कासिम ने कहा कि वह दीदी के पास आए हैं और उनसे बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि वह हमेशा दीदी के पास आते रहते हैं और आज भी उनसे मिलने आए हैं।
इसके बाद उन्होंने बागी गुट पर निशाना साधा। कासिम ने कहा कि वहां मौजूद कई विधायक वापस आना चाहते हैं। धीरे-धीरे सभी को ऋतब्रत बनर्जी की सच्चाई पता चल रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जो विधायक अभी ऋतब्रत के साथ हैं, वे वहां ज्यादा समय तक नहीं रहेंगे। कासिम ने कहा कि वे सिर्फ कुछ दिनों के लिए वहां हैं और वापस आएंगे।
कासिम के बयान से क्यों बढ़ी हलचल?
कासिम का बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह खुद बागी गुट का हिस्सा रह चुके हैं। ऐसे में उनके वापस लौटने और अन्य विधायकों के भी लौटने के दावे से तृणमूल कांग्रेस के भीतर नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, कासिम ने उन विधायकों के नाम नहीं बताए, जिनके लौटने का उन्होंने दावा किया है।
कैसे हुई थी टीएमसी में फूट?
तृणमूल कांग्रेस के भीतर मतभेद बढ़ने के बाद पार्टी के विधायकों का एक गुट ऋतब्रत बनर्जी के साथ अलग हो गया था। इसके बाद पार्टी के भीतर दो खेमे स्पष्ट रूप से बन गए। एक ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला खेमा था, जबकि दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी के साथ गए विधायक थे। दोनों पक्षों के बीच विधायी नेतृत्व और पार्टी के प्रतिनिधित्व को लेकर टकराव बढ़ गया।
बागी गुट ने खुद को असली तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधि बताते हुए विधानसभा में अलग नेतृत्व का दावा किया। इसके बाद मामला राजनीतिक विवाद से आगे बढ़कर कानूनी लड़ाई तक पहुंच गया। इसके बाद टीएमसी के 20 सांसदों ने भी पार्टी से नाता तोड़ लिया।
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