पांगी में सतीश शर्मा का इस्तीफा, स्थानीय राजनीति में हलचल

पांगी। जनजातीय क्षेत्र पांगी में राजनीति का तापमान अचानक बढ़ गया है। जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्य सतीश शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे न केवल स्थानीय राजनीति में हलचल मची है, बल्कि सत्ताधारी दल के अंदर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
सतीश शर्मा का आरोप है कि पांगी क्षेत्र में अपेक्षित विकास कार्य नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार पर क्षेत्र की उपेक्षा करने का आरोप लगाया और कहा कि जनजातीय होने के बावजूद योजनाओं का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुँच पा रहा। उनका इस्तीफा मुख्यमंत्री को ई-मेल के जरिए भेजा गया है।
सतीश शर्मा को 1 मई 2023 को इन समितियों का सदस्य नियुक्त किया गया था। त्यागपत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताया और लिखा कि पिछले तीन साल में पांगी घाटी में कोई ठोस विकास कार्य धरातल पर नजर नहीं आया। उन्होंने विभिन्न प्रशासनिक मुद्दों पर आपत्तियां उठाई हैं, जिनमें पांगी लोनिवि मंडल में अधिशासी अभियंता का पद लंबित होना, सहायक अभियंता को अनुचित रूप से अधिशासी अभियंता की शक्तियां देना, रिक्त पदों की समस्या और मिनी सचिवालय के लिए 55 लाख रुपये की फर्नीचर खरीद शामिल हैं।
सतीश शर्मा पांगी की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माने जाते हैं और पंचायत स्तर पर प्रधान के रूप में भी लंबे समय से काम कर चुके हैं। उनके इस्तीफे को केवल प्रशासनिक कदम के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, उनका कार्यकाल मार्च तक बढ़ाया गया था और नई नियुक्तियों को लेकर भी चर्चा चल रही थी। ऐसे में इस्तीफा देने का कदम कई राजनीतिक सवाल खड़े कर रहा है।
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