पुंछ में आतंकी ठिकाने से सात कंटेनर बरामद, IED होने की आशंका

HIGHLIGHTS
- 156 टेरिटोरियल आर्मी से मिली सूचना के आधार पर मेंढर तहसील के कसबलारी इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया।
- बरामद संदिग्ध सामान में एक काला बैग, कॉम्बैट पाउच, लोहे का बॉक्स, पावर एडाप्टर और टिफिन शामिल हैं।
- प्रारंभिक जांच में मैगजीन के 7.62 एमएम एलएमजी से संबंधित होने की आशंका जताई गई है।
पुंछ। जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती पुंछ जिले में सुरक्षा बलों ने शुक्रवार को संयुक्त तलाशी अभियान चलाकर एक आतंकी ठिकाने से सात कंटेनरों में विस्फोटक सामग्री बरामद की। टेप से लिपटे इन कंटेनरों में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) होने की आशंका है।
मामले की जांच अभी जारी है। पिछले 10 दिनों के दौरान पुंछ और राजौरी जिलों में चार बार हथियार और गोलाबारूद बरामद किए जा चुके हैं। ये सभी हथियार पुराने बताए जा रहे हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां फिर भी इन मामलों की जांच कर रही हैं।
कंटेनरों से विस्फोटक सामग्री बरामद
जानकारी के मुताबिक, 156 टेरिटोरियल आर्मी से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने मेंढर तहसील के कसबलारी इलाके में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान सात कंटेनरों के अलावा एक काला बैग, एक कॉम्बैट पाउच, काले रंग का लोहे का बॉक्स, एक मैगजीन, एक एल्युमिनियम कंटेनर, दो पावर एडाप्टर और एक टिफिन भी मिला। सभी संदिग्ध वस्तुओं को कब्जे में लेकर जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि बरामद मैगजीन 7.62 एमएम एलएमजी से संबंधित हो सकती है। हालांकि, बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि जांच और तकनीकी परीक्षण पूरा होने के बाद ही हो सकेगी।
नियंत्रण रेखा के पास स्थित होने और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते पुंछ जिले को सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां सीमावर्ती और दूरदराज के इलाकों में लगातार निगरानी रखती हैं।
इससे पहले विजयादशमी के अवसर पर पुंछ में एक मंदिर की छत से ग्रेनेड बरामद हुआ था। उस समय मंदिर में भंडारा चल रहा था। इसके अलावा, राजौरी के जंगल क्षेत्र चोर हिल और पुंछ के साब्जियां इलाके में भी आतंकी ठिकानों से हथियार बरामद किए गए थे।
पीएसए कानून पर हाई कोर्ट सख्त
हाई कोर्ट ने कहा है कि सामान्य आपराधिक मामलों को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बताकर किसी व्यक्ति को जन सुरक्षा कानून (PSA) के तहत हिरासत में नहीं रखा जा सकता। यदि ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए सामान्य कानूनी प्रक्रिया पर्याप्त है, तो एहतियातन हिरासत का सहारा लेना उचित नहीं है।
चीफ जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस मोहम्मद यूसुफ वानी की खंडपीठ ने कुलगाम निवासी तारिक की हिरासत रद्द कर दी।
अदालत ने 25 सितंबर, 2026 को सिंगल बेंच द्वारा हिरासत को सही ठहराने वाले फैसले को भी निरस्त कर दिया और अधिकारियों को तारिक को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
मामले के अनुसार, कुलगाम के जिला मजिस्ट्रेट ने 13 दिसंबर, 2025 को पीएसए के तहत हिरासत का आदेश जारी किया था। तारिक पर कुलगाम, अनंतनाग और शोपियां में मवेशियों व भेड़ों की चोरी, घर में घुसने और सेंधमारी समेत 11 आपराधिक मामलों में शामिल होने के आरोप थे।
प्रशासन का कहना था कि इन घटनाओं के कारण ग्रामीणों के बीच असुरक्षा का माहौल पैदा हुआ था। तारिक की पत्नी नाहिदा ने हाई कोर्ट में हिरासत के आदेश को चुनौती दी थी। उनके वकील ने दलील दी कि संबंधित मामलों में आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं और आरोपी को जमानत भी मिल गई थी।
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