सत्ता परिवर्तन विवाद पर शशि थरूर का पलटवार, बोले- भारत की तुलना बांग्लादेश से नहीं हो सकती

HIGHLIGHTS
- शशि थरूर ने भारत में राजनीतिक बदलाव की चर्चा पर अपना पक्ष रखा।
- किरेन रिजिजू ने विपक्ष से जुड़े नेताओं की चर्चा वाला वीडियो साझा किया था।
- थरूर ने फ्रांस में हुई हिंसक घटनाओं से भारत की तुलना को अनुचित बताया।
नई दिल्ली। 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) को लेकर जारी बयानबाजी के बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के भारत और बांग्लादेश की तुलना करने वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी है। थरूर ने कहा कि भारत की तुलना बांग्लादेश या फ्रांस से करना उचित नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि विपक्ष की मांग केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की है।
इससे पहले, किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा की आलोचनाओं पर पलटवार किया था। नेहा बोरा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए 'सत्ता परिवर्तन' का जिक्र किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाताओं के नाम सूची से हटाना है।
रिजिजू ने कहा था- भारत बांग्लादेश नहीं है
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए रिजिजू ने 'सत्ता परिवर्तन' की बात करने वाले विपक्ष से जुड़े नेताओं पर निशाना साधा था। उन्होंने लिखा, 'इन लोगों को देखिए, जो सत्ता परिवर्तन लाना चाहते हैं। ध्यान से सुन लें: भारत, बांग्लादेश नहीं है।'
रिजिजू ने आगे कहा कि भारत के युवा समझदार हैं और देश को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। उनके मुताबिक, युवा खेलों में पदक जीतने के साथ कौशल विकास, नवाचार, स्टार्टअप और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं तथा सांस्कृतिक प्रतीक बन रहे हैं।
विपक्षी नेताओं के बयानों वाली क्लिप साझा की
रिजिजू की ओर से साझा किए गए वीडियो में नेहा बोरा, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल सहित कई लोगों के बयानों के अंश शामिल थे। इन नेताओं ने अलग-अलग मौकों पर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए 'सत्ता परिवर्तन' की बात कही थी।
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने सोमवार को कहा कि भारत की तुलना बांग्लादेश या फ्रांस से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी तुलनाएं प्रासंगिक नहीं लगतीं।
थरूर ने फ्रांस में हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि बसों और पुलिस थानों में आग लगाने जैसी घटनाओं का समर्थन नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में विश्वास करता है और उसी का समर्थन करता है। उन्होंने फ्रांस में महंगाई और अन्य मुद्दों को लेकर हुए दंगों का भी जिक्र किया।
'हमारी मांग सिर्फ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की है'
थरूर ने कहा कि 'सत्ता परिवर्तन' जैसे शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मांग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की है।
उनके मुताबिक, चिंता का विषय यह है कि एक त्रुटिपूर्ण, अनियमित और आंशिक रूप से अवैध प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इसी वजह से विपक्ष इस पूरी प्रक्रिया को रद्द करने की मांग कर रहा है।
थरूर ने इसे संवैधानिक मुद्दा बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी सरकार को गिराना या ऐसा कुछ करना नहीं है।
बांग्लादेश में भी उठा था सत्ता परिवर्तन का मुद्दा
बांग्लादेश में प्रधानमंत्री पद से हटने से पहले शेख हसीना ने आरोप लगाया था कि उनके देश और म्यांमार के कुछ हिस्सों को अलग करके एक 'ईसाई राष्ट्र' बनाने की साजिश 'गोरे लोगों' की ओर से रची जा रही है।
विरोध प्रदर्शनों और बड़े पैमाने पर हुई तबाही के बीच शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद उनके बेटे साजीब वाजेद ने आरोप लगाया था कि अमेरिका की पिछली सरकार ने बांग्लादेश में 'सत्ता परिवर्तन' के लिए 'लाखों डॉलर' खर्च किए थे।
कहां से शुरू हुआ 'सत्ता परिवर्तन' का विवाद?
भाजपा के कई नेताओं ने 'सत्ता परिवर्तन' की चर्चा को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। कांग्रेस, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और वामपंथी दल दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।
इन दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। CJP को विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त है। इसका नेतृत्व विदेश में पढ़ाई कर चुके एक जनसंपर्क स्नातक और कुछ अन्य लोग कर रहे हैं, जिन्होंने कांग्रेस तथा राहुल गांधी सहित पार्टी के नेताओं का खुलकर समर्थन किया है।
इससे पहले, इन लोगों ने NEET परीक्षा के पेपर लीक के मुद्दे पर भी विरोध प्रदर्शन किया था। इस मामले के बाद धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग ने SIR प्रक्रिया को लेकर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है।
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