कथावाचकों को जूतों की माला पहनाकर घुमाया जाना चाहिए: आरडी प्रजापति

मध्यप्रदेश में सामाजिक न्याय, आरक्षण और प्रशासनिक फैसलों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक टकराव तेज हो गया है। रविवार को भोपाल के भेल दशहरा मैदान में ओबीसी-एससी-एसटी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर विशाल महासम्मेलन और प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन अपाक्स (APACS) के बैनर तले हुआ, जिसमें राज्यभर से कर्मचारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
महासम्मेलन के दौरान छतरपुर की चंदला विधानसभा से पूर्व विधायक आरडी प्रजापति के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कुछ कथावाचकों पर महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले बयानों का आरोप लगाया। प्रजापति ने मंच से कहा कि ऐसी भाषा किसी धर्म, परंपरा या शास्त्र का हिस्सा नहीं हो सकती और महिलाओं की गरिमा पर सवाल उठाना पूरे समाज के लिए शर्म की बात है। उन्होंने कथावाचकों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि कुछ व्यासपीठों से महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक बातें कही जाती रही हैं और ऐसे कथावाचकों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
आरडी प्रजापति वर्ष 2013 में भाजपा के टिकट पर चंदला विधानसभा से विधायक चुने गए थे। 2018 में भाजपा ने उनका टिकट काटकर उनके बेटे राजेश प्रजापति को उम्मीदवार बनाया, जो 2018 से 2023 तक विधायक रहे। इसके बाद आरडी प्रजापति समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए और 2024 में सपा के टिकट पर टीकमगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
संतोष वर्मा प्रकरण ने बदला सामाजिक समीकरण
मीडिया में आई जानकारी के अनुसार IAS अधिकारी संतोष वर्मा के कथित बयान के बाद सवर्ण समाज के संगठनों ने कड़ा विरोध जताया था और प्रशासनिक कार्रवाई हुई थी। अब स्थिति उलट नजर आ रही है। एससी-एसटी-ओबीसी संगठनों ने संतोष वर्मा के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। महासम्मेलन का मुख्य मुद्दा भी यही रहा। प्रदर्शनकारियों ने संतोष वर्मा पर हुई कार्रवाई को तत्काल वापस लेने की मांग की। संयुक्त संघर्ष मोर्चा का आरोप है कि यह कार्रवाई दबाव में और एकतरफा तरीके से की गई, जो दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग की आवाज दबाने का प्रयास है।
आरक्षण और सामाजिक न्याय की मांग
महासम्मेलन में नेताओं ने कहा कि प्रदेश में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक नियुक्तियों में लगातार उपेक्षा झेलनी पड़ रही है। हजारों पद वर्षों से खाली हैं, पदोन्नति में आरक्षण लागू नहीं हो पा रहा और संवैधानिक अधिकार केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और प्रशासनिक निष्पक्षता की लड़ाई है।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा की प्रमुख मांगें:
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ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण
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सभी रिक्त और बैकलॉग पदों पर शीघ्र भर्ती
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पदोन्नति में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण
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निजी और संविदा क्षेत्र में आरक्षण लागू करना
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पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
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संवैधानिक संस्थाओं में जनसंख्या अनुपात में प्रतिनिधित्व
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IAS संतोष वर्मा पर हुई कार्रवाई को तत्काल वापस लेना
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