नोएडा स्पोर्ट्स सिटी पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, प्राधिकरण को आदेशों का पालन अनिवार्य

नोएडा। लंबे समय से रुकी हुई नोएडा स्पोर्ट्स सिटी परियोजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने नोएडा प्राधिकरण को अंतिम अवसर देते हुए स्पष्ट किया कि पहले जारी किए गए आदेशों का पालन करना अब अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि इस परियोजना से जुड़े मामलों में अब और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। इस परियोजना में हजारों घर खरीदारों की रुकी हुई उम्मीदें भी जुड़ी हैं, जो कई वर्षों से अपने घर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस एम एम सुंदरश और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह शामिल थे, ने कहा कि 24 नवंबर 2025 और 15 जनवरी 2026 के आदेशों का पालन करना नोएडा प्राधिकरण के लिए अनिवार्य है। अदालत ने पहले ही इस परियोजना को फिर से शुरू करने के लिए एक संरचित योजना को मंजूरी दी थी।
नोएडा स्पोर्ट्स सिटी परियोजना क्या है?
सेक्टर-150 में प्रस्तावित यह परियोजना उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी मिश्रित विकास योजनाओं में से एक है। योजना में खेल सुविधाओं के साथ-साथ आवासीय और व्यावसायिक संरचना विकसित की जानी थी। परियोजना में स्पोर्ट्स अकादमी, प्रशिक्षण केंद्र और आधुनिक खेल सुविधाएं शामिल थीं। इस परियोजना में हजारों लोगों ने निवेश किया है।
परियोजना पर रोक क्यों लगी थी?
जनवरी 2021 में नोएडा प्राधिकरण की 201वीं बोर्ड बैठक में चार स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं पर काम रोकने का निर्णय लिया गया था। नियामकीय कारणों से निर्माण कार्य ठप हो गया, जिससे लगभग 20 हजार घर खरीदारों को अपने घर मिलने में देरी का सामना करना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठाए गए कदम
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-150 में एससी-02 स्पोर्ट्स सिटी परियोजना पर लगी रोक हटा दी। यह निर्णय प्राधिकरण की 221वीं बोर्ड बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने की। बोर्ड ने यह भी निर्देश दिया कि परियोजना के सभी आगे के कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप ही उठाए जाएं।
आगे की प्रक्रिया
परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए डेवलपर को 30 दिनों के भीतर संशोधित मास्टर प्लान जमा करना होगा। नोएडा प्राधिकरण इस मास्टर प्लान की समीक्षा करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि योजना मूल स्पोर्ट्स सिटी नीति के अनुरूप है। कोर्ट के निर्देशों के अनुसार डेवलपर को सभी शर्तों का पालन करना होगा, इसके बाद ही निर्माण कार्य को पूरी तरह से आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी।
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