‘किसानों के मामले से दूर रहें स्वामी यशवीर, वरना चिमटा-कोंचा भी छिन सकता है’: धीरज लाटियान

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की मासिक समीक्षा बैठक इस बार किसान मुद्दों से ज्यादा एक विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में आ गई।
- मंच से दिए गए बयान ने न सिर्फ माहौल को गरमा दिया, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी नई चर्चा शुरू कर दी है।
- बैठक के दौरान भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष धीरज लाटियान ने योगपीठ आश्रम बघरा के पीठाधीश्वर Swami Yashveer Singh को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें किसानों के मामलों से दूर रहने की चेतावनी दी।
- उन्होंने मंच से कहा कि यदि ऐसे लोग राजनीति में आने क…
मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की मासिक समीक्षा बैठक इस बार किसान मुद्दों से ज्यादा एक विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में आ गई। मंच से दिए गए बयान ने न सिर्फ माहौल को गरमा दिया, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी नई चर्चा शुरू कर दी है।
बैठक के दौरान भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष धीरज लाटियान ने योगपीठ आश्रम बघरा के पीठाधीश्वर Swami Yashveer Singh को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें किसानों के मामलों से दूर रहने की चेतावनी दी। उन्होंने मंच से कहा कि यदि ऐसे लोग राजनीति में आने की कोशिश करेंगे तो स्थिति बिगड़ सकती है।
उनके इस बयान के बाद सभा स्थल पर मौजूद लोगों के बीच हलचल देखी गई और माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया।

भोपा प्रकरण से जुड़ा विवाद
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भोपा क्षेत्र के कथित धर्मांतरण मामले को सबसे पहले स्वामी यशवीर सिंह ने ही सार्वजनिक रूप से उठाया था। वहीं भाकियू पहले ही इस मामले को लेकर पुलिस और कुछ संगठनों पर किसान को निशाना बनाने और मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने के आरोप लगा चुकी है।
ऐसे में मंच से दिया गया यह बयान अब एक नए टकराव की ओर संकेत कर रहा है।
किसान मुद्दों पर सख्त रुख
बैठक के दौरान संगठन ने किसान हितों को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया और कहा कि किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी भी दी।
बैठक में बिजली, यूरिया की उपलब्धता, सिंचाई के लिए राजवाहों में पानी और आगामी किसान चिंतन महाशिविर जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
बढ़ता सियासी तनाव
इस बयान के बाद जिले में नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या भोपा प्रकरण अब किसान संगठन और धार्मिक नेतृत्व के बीच सीधा टकराव बनता जा रहा है।
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