तिब्बत में 7.0 तीव्रता का भूकंप, जमीन से 173 किलोमीटर नीचे था केंद्र

HIGHLIGHTS
- राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने भूकंप की जानकारी दी।
- भूकंप का केंद्र धरती के भीतर 173 किलोमीटर की गहराई में था।
- सितंबर में भी तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ था।
तिब्बत में रात करीब 8:03 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.0 दर्ज की गई। इसका केंद्र जमीन से 173 किलोमीटर की गहराई में था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने भूकंप से जुड़ी यह जानकारी दी।
पिछले महीने भी तिब्बत में आया था भूकंप
इससे पहले तीन सितंबर को भी तिब्बत में भूकंप आया था। उस समय रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.0 मापी गई थी। दोपहर करीब 1:46 बजे भूकंप के झटके दर्ज किए गए थे। इसका केंद्र 31.479 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 80.370 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। भूकंप की गहराई जमीन के भीतर करीब 14 किलोमीटर बताई गई थी। इसका स्थान तिब्बत क्षेत्र में दर्ज किया गया था।
पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा तिब्बत
26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद तिब्बत में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। इसके बाद क्षेत्र को बाढ़ का भी सामना करना पड़ा। चीन की सीमा से सटे इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही देखने को मिली है।
जनवरी 2025 में भी भूकंप से हुई थी भारी तबाही
जनवरी 2025 में भी तिब्बत में भूकंप के तेज झटके आए थे। इस विनाशकारी भूकंप में 120 से अधिक लोगों की जान चली गई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे। चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (सीईएनसी) के मुताबिक, सुबह 9:05 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.8 दर्ज की गई थी।
क्यों आते हैं भूकंप?
पृथ्वी के भीतर सात टेक्टोनिक प्लेटें मौजूद हैं, जो लगातार गतिशील रहती हैं। जिन स्थानों पर ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, उन्हें फॉल्ट लाइन कहा जाता है। पृथ्वी के अंदर मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने, टकराने या एक-दूसरे से रगड़ खाने के कारण ऊर्जा पैदा होती है। जब प्लेटों के टकराने से बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है, तो धरती की सतह पर कंपन होने लगता है। प्लेटों के टकराने वाले स्थान पर भूकंप का असर सबसे अधिक होता है। हालांकि, भूकंप की तीव्रता ज्यादा होने पर इसके झटके दूर-दराज के क्षेत्रों में भी महसूस किए जा सकते हैं।
कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?
भूकंप की तीव्रता मापने के लिए वैज्ञानिक रिक्टर स्केल का इस्तेमाल करते हैं। भूकंप आने पर पृथ्वी के भीतर से ऊर्जा तरंगें निकलती हैं, जिनके आधार पर इसकी तीव्रता का पता लगाया जाता है। इससे भूकंप की तीव्रता और उसके केंद्र के बारे में जानकारी मिलती है।
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