अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला, बोले- 1984 के सिख नरसंहार की बरसी पर रैली क्यों की?

HIGHLIGHTS
- अमित शाह ने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस से 1 से 3 नवंबर के बीच रैली न करने की अपील की थी।
- उन्होंने राजीव गांधी के पुराने बयान का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा।
- शाह ने दावा किया कि संवेदनशील तारीख पर कार्यक्रम से सिख परिवारों की भावनाएं आहत हुईं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को चंडीगढ़ के स्थापना दिवस समारोह में कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाने पर लिया। उन्होंने 1984 के सिख नरसंहार की बरसी पर दिल्ली में कांग्रेस की रैली आयोजित किए जाने पर सवाल उठाए। शाह ने कहा कि जिस दिन हजारों सिखों की निर्मम हत्या हुई थी, उसी दिन कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम करने की क्या जरूरत थी। उन्होंने राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान पर तंज कसते हुए कहा कि वहां से नफरत के अलावा कुछ नहीं मिलेगा।
भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस से की थी अपील: शाह
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस को शुरुआत में शायद लगा होगा कि राहुल गांधी उस समय छोटे थे या उन्होंने इतिहास नहीं पढ़ा, इसलिए उन्हें इस दिन के महत्व की जानकारी नहीं होगी। हालांकि, भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कांग्रेस से अपील की थी कि 1, 2 और 3 नवंबर को कोई रैली आयोजित न की जाए, क्योंकि इन्हीं तारीखों में सिख विरोधी दंगे हुए थे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एक बार कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। अब उनके बेटे राहुल गांधी ने उसी दिन दिल्ली में बड़ी रैली की। शाह के मुताबिक, भाजपा ने कांग्रेस से आग्रह किया था कि 1 से 3 नवंबर के बीच कोई बड़ा राजनीतिक आयोजन न किया जाए, ताकि सिख समुदाय की माताओं, बहनों और बच्चों की भावनाएं आहत न हों।
कांग्रेस नेतृत्व पर जिद करने का आरोप
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व अपनी जिद पर कायम रहा। उन्होंने दावा किया कि विदेश से आदेश दिए गए कि उसी दिन रैली आयोजित की जाए, जिस दिन हजारों सिखों को जिंदा जलाया गया था।
अमित शाह ने गुरुओं की धरती से कांग्रेस के इस प्रयास की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि भारत और पंजाब 1984 के उस दर्दनाक इतिहास को कभी नहीं भूल सकते। उनके मुताबिक, सिख विरोधी दंगों का दर्द आज भी पीड़ित परिवारों के दिलों में मौजूद है और ऐसे संवेदनशील दिन पर राजनीतिक कार्यक्रम करना उनके पुराने जख्मों को फिर से कुरेदने जैसा है।
चंडीगढ़ को करीब 258 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात
अमित शाह ने चंडीगढ़ में लगभग 258 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने शहर के विकास, पुलिस आवास, सार्वजनिक परिवहन और शिक्षा व स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं का जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ की चार पुरानी मांगों पर भी केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। इनमें से तीन मांगों को दीपावली के बाद पूरा करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इनकी घोषणा प्रशासक गुलाब चंद कटारिया एक अलग कार्यक्रम में करेंगे।
देश का नंबर एक सिटी बस डिपो बनाने का लक्ष्य
गृह मंत्री ने करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाले सिटी बस डिपो का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस परियोजना का डिजाइन विस्तार से देखा है। यह अंतरराज्यीय बस डिपो देश के बेहतरीन डिपो में शामिल होगा और इससे चंडीगढ़ की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा पुलिस विभाग के लिए लगभग 68 करोड़ रुपये की लागत से 196 टाइप-3 आवासीय मकान बनाए जाएंगे। अमित शाह ने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस को राष्ट्रपति का निशान मिलने के साथ ही पुलिसकर्मियों को बेहतर आवास देने की दिशा में भी काम हो रहा है। उनका लक्ष्य है कि 2029 तक चंडीगढ़ पुलिस आवासीय संतुष्टि के मामले में देश में पहले स्थान पर पहुंचे।
चंडीगढ़ के लिए एक नवंबर का विशेष महत्व
अमित शाह ने कहा कि एक नवंबर चंडीगढ़ के इतिहास में कई वजहों से महत्वपूर्ण है। वर्ष 1966 में इसी तारीख को चंडीगढ़ और हरियाणा की स्थापना हुई थी। इसी दिन चंडीगढ़ पुलिस की शुरुआत भी हुई थी और आज ही पुलिस को राष्ट्रपति का निशान प्राप्त करने का गौरव मिला है।
उन्होंने कहा कि शिवालिक की गोद में बसे चंडीगढ़ का नाम मां चंडी के नाम पर रखा गया है। यह महान सिख गुरुओं की कर्मभूमि भी है। पंजाब और हरियाणा के बीच स्थित चंडीगढ़ पूरे उत्तर भारत की एक महत्वपूर्ण पहचान है। शाह के मुताबिक, देश के सुनियोजित शहरों की चर्चा होने पर चंडीगढ़ का नाम सबसे पहले आता है।
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