नए वायुसेना प्रमुख आशुतोष दीक्षित ने गिनाईं प्राथमिकताएं, 'वायु' से समझाया अपना प्लान

HIGHLIGHTS
- आशुतोष दीक्षित ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी।
- उन्होंने पूर्व वायुसेना प्रमुख एपी सिंह के नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर के प्रदर्शन की सराहना की।
- तेजस एमके-1ए, एमके-2 और एएमसीए जैसे स्वदेशी प्रोजेक्ट प्राथमिकता में रहेंगे।
एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कल भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख के तौर पर जिम्मेदारी संभाल ली। आज परेड ग्राउंड में सलामी लेने के बाद उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में कमान संभालना उनके लिए बड़े सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के सामने चुनौतियां अब भी गंभीर हैं। ड्रोन और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाले हथियारों समेत नई तकनीकों और प्रणालियों के कारण युद्ध का स्वरूप लगातार बदल रहा है।
नए वायुसेना प्रमुख के मुताबिक, भारतीय वायुसेना को आने वाले दशक में देश की जरूरतों के अनुरूप खुद को आधुनिक और सक्षम बनाना होगा। इसके साथ ही युद्ध लड़ने और जीतने के लिए हर समय तैयार रहना भी जरूरी है।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के प्रति जताया आभार
एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा, 'भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के तौर पर कमान संभालना मेरे लिए अत्यंत सम्मान की बात है। मुझ पर विश्वास जताने के लिए मैं राष्ट्रपति एवं हमारी सर्वोच्च कमांडर, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री का आभार व्यक्त करता हूं।'
उन्होंने बताया कि आज सुबह उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर मातृभूमि की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके अनुसार, जवानों का साहस वायुसेना के लिए वह मानक है, जिसके आधार पर वह खुद का मूल्यांकन करेगी।
दीक्षित ने पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह उनसे वायुसेना की कमान संभाल रहे हैं। एपी सिंह के नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने अपनी सटीक और निर्णायक हवाई ताकत का प्रदर्शन किया था। उन्होंने एपी सिंह का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें पूरी तरह तैयार और मजबूत स्थिति में वायुसेना की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के साथ ड्रोन, लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाले हथियार, अंतरिक्ष, साइबर तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम जैसी नई प्रणालियां युद्ध की प्रकृति बदल रही हैं। ऐसे में वायुसेना को अगले दशक में देश की आवश्यकताओं के अनुसार खुद को तैयार करना होगा और हर परिस्थिति में युद्ध लड़ने तथा जीतने की क्षमता बनाए रखनी होगी।
इससे पहले एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित इलेक्ट्रिक वाहन से परेड ग्राउंड पहुंचे और वहां परेड की सलामी ली। इसके बाद वह नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक भी गए।
'वायु' के जरिए बताईं वायुसेना की प्राथमिकताएं
वायुसेना प्रमुख ने अपनी प्राथमिकताओं को एक शब्द में व्यक्त करते हुए इसे 'वायु' (VAYU) नाम दिया। उन्होंने इसके प्रत्येक अक्षर का अर्थ और उससे जुड़ी प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी दी।
V का अर्थ विजिलेंस, विक्ट्री और रेडीनेस (सतर्कता, जीत और तत्परता) है। उन्होंने कहा कि वायुसेना के हर स्क्वाड्रन, रडार, एयर डिफेंस यूनिट और जवान को किसी भी समय जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा। अपनी लड़ाकू क्षमता को दोबारा मजबूत करना भी उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
A का मतलब आत्मनिर्भरता है। इसके तहत तेजस एमके-1ए और एमके-2, एएमसीए, भारतीय सेंसर और स्वदेशी हथियारों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भारतीय तकनीक और स्वदेशी समाधानों के आधार पर लड़ने के साथ जरूरत के मुताबिक इनकी पर्याप्त संख्या सुनिश्चित की जाएगी, ताकि रखरखाव और सैन्य अभियानों से जुड़ी आवश्यकताएं पूरी हो सकें।
उन्होंने कहा कि वायुसेना की जिम्मेदारी युद्ध लड़ना और जीतना है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि उसकी भरोसेमंद हवाई ताकत संघर्ष को रोकने में सक्षम हो।
Y का अर्थ युक्ति है। इसमें सोच, नए विचारों, रणनीति और तकनीक में नवाचार को शामिल किया गया है। दीक्षित ने कहा कि नेटवर्क आधारित और एआई संचालित कमान एवं नियंत्रण प्रणाली, ड्रोन के खिलाफ बहुस्तरीय रक्षा व्यवस्था, रखरखाव की सुविधा, सैन्य ठिकानों की सुरक्षा, हर चुनौती से निपटने की क्षमता और अंतरिक्ष के निकटवर्ती क्षेत्र का वायुसेना अभियानों में इस्तेमाल ऐसे विषय हैं, जिनकी लगातार समीक्षा कर उनमें सुधार किया जाएगा।
U का मतलब सामूहिक प्रयास और एकजुटता (यूनिटी ऑफ एफर्ट) है। उन्होंने कहा कि 'जय' (JAI) के विजन यानी संयुक्त सैन्य तालमेल, आत्मनिर्भरता और नवाचार के अनुरूप थलसेना, नौसेना और राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर योजनाएं बनाई जाएंगी और काम किया जाएगा। उनके मुताबिक, हवाई ताकत का सबसे प्रभावी इस्तेमाल तभी संभव है, जब इसे शुरुआत से ही सभी सैन्य योजनाओं का हिस्सा बनाया जाए।
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