बंगाल चुनाव: IPS अजय पाल शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

लखनऊ। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान तैनात उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। चुनाव आयोग द्वारा पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में नियुक्त किए गए अजय पाल शर्मा की सख्त कार्यशैली को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने आपत्ति जताई है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां उनके खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई है।
प्रयागराज में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के पद पर कार्यरत अजय पाल शर्मा को हटाने की मांग करते हुए याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनकी भूमिका निष्पक्षता के मानकों के अनुरूप नहीं रही है। याचिका में दावा किया गया है कि उन्होंने दक्षिण 24 परगना क्षेत्र में तैनाती के दौरान कुछ राजनीतिक उम्मीदवारों के खिलाफ कठोर रवैया अपनाया और कथित तौर पर दबाव बनाने की कोशिश की।
याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला देते हुए कहा है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं, इसलिए चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि ऐसे व्यवहार से चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है और समान अवसर (लेवल प्लेइंग फील्ड) पर असर पड़ता है।
याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया है कि चुनाव पर्यवेक्षकों की भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष और निगरानी आधारित होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के भरोसे को कमजोर कर सकती है।
इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि चुनावी प्रक्रिया के बीच इस तरह का हस्तक्षेप आचार संहिता से जुड़ी स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
उधर, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें अजय पाल शर्मा कथित तौर पर टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के घर के बाहर सख्त लहजे में चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। इसी घटना को लेकर विवाद और तेज हो गया है।
बताया जा रहा है कि मतदान से पहले दक्षिण 24 परगना के फलता विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं को धमकाने और पहचान पत्र छीनने जैसी शिकायतों के बाद पुलिस और केंद्रीय बलों ने कार्रवाई की थी, जिसका नेतृत्व अजय पाल शर्मा कर रहे थे। इस दौरान उम्मीदवार जहांगीर खान मौजूद नहीं थे, लेकिन उनके समर्थकों को सख्त चेतावनी दी गई थी।
टीएमसी ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक दबाव और साजिश करार दिया है, जबकि मामला अब न्यायिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
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