बंगाल मतदाता सूची विवाद: सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आज पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं वकीलों के बीच उपस्थित रहीं। सुनवाई की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने की।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें बंगाल के दो साथी न्यायाधीशों से जानकारी मिली, जिन्होंने पास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया समझाई, और इसी आधार पर इस मुद्दे को शामिल किया गया। ममता बनर्जी के पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि अदालत ने पहले तार्किक विसंगतियों की सूची प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
मतदाता सूची में विसंगतियां और लंबित मामले
दीवान ने बताया कि केवल चार दिन शेष हैं, और 32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं हैं। इसके अलावा, 1.36 करोड़ नाम तार्किक विसंगति सूची में हैं और 63 लाख मामले सुनवाई के लिए लंबित हैं। उन्होंने कहा कि निवास प्रमाण पत्र, आधार और ओबीसी प्रमाण पत्र जैसे मान्य दस्तावेजों को अस्वीकार किया जा रहा है, जिससे लोगों को चार से पांच घंटे तक कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आरोप
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि SIR प्रक्रिया का उपयोग केवल नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण दिए कि शादी के बाद महिलाओं के नाम उनके पति के उपनाम के कारण मतदाता सूची से हटा दिए जा रहे हैं। इसके अलावा, फ्लैट खरीदने या निवास स्थान बदलने वाले गरीब लोगों के नाम भी हटाए जा रहे हैं।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों से सूक्ष्म पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं, जो बिना उचित सत्यापन के नाम हटा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फॉर्म 6 भरने की अनुमति नहीं दी जा रही और कई जीवित व्यक्तियों को गलत तरीके से मृत घोषित किया गया। उनके अनुसार अब तक 58 लाख नाम हटाए जा चुके हैं, और केवल बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है।
नाम संबंधी विसंगतियां और न्यायालय की टिप्पणियां
न्यायमूर्ति बागची ने नामों के उच्चारण को लेकर टिप्पणी की। इस पर ममता बनर्जी ने कहा कि गलत उच्चारण या स्थानीय बोलियों के कारण मतदाता परेशान हो रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने चुनाव आयोग से अधिकारियों को संवेदनशील रहने और नोटिस जारी करने में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
न्यायालय ने लिया आगे का कदम
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य से ग्रुप बी के उन अधिकारियों की सूची प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जिन्हें कार्यमुक्त किया जा सकता है। सुनवाई अगले सोमवार तक जारी रहेगी और पीठ सभी संबंधित मुद्दों पर विचार करेगी। ममता बनर्जी ने न्यायालय से जनता के अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया और लोकतंत्र को सुरक्षित रखने के लिए समर्थन मांगा।
ECI के SIR आदेशों को रद्द करने की मांग
सीएम ममता बनर्जी ने याचिका में चुनाव आयोग द्वारा 24 जून और 27 अक्टूबर, 2025 को जारी SIR आदेशों को रद्द करने और आगामी विधानसभा चुनाव 2025 मतदाता सूची के आधार पर कराने की मांग की। उनका तर्क है कि वर्तमान SIR प्रक्रिया आधारभूत सूची पर निर्भर होने और जटिल सत्यापन प्रक्रिया के कारण वास्तविक मतदाताओं के मतदान अधिकारों के लिए खतरा पैदा करती है।
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