पटना में अधिग्रहित जमीन पर मीरा कुमार को मिलेगा मुआवजा, हाई कोर्ट का अहम फैसला

HIGHLIGHTS
- पटना के मैनपुरा में करीब 18 कट्ठा 10 धूर जमीन से जुड़ा है मामला।
- राज्य सरकार ने 1975-76 में नाला निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहित की थी।
- मूल भू-स्वामिनी इंद्राणी देवी और उनकी उत्तराधिकारी मीरा कुमार को मुआवजा नहीं मिला था।
पटना। पटना हाई कोर्ट ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें अधिग्रहित जमीन के मुआवजे का हकदार माना है। अदालत ने पटना के जिलाधिकारी के 12 अप्रैल 2023 के आदेश को रद्द करते हुए परिवार की जमाबंदी बहाल करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति खतीम रजा की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाया। मामला पटना के मैनपुरा स्थित करीब 18 कट्ठा 10 धूर जमीन से जुड़ा है, जिसे राज्य सरकार ने 1975-76 में नाला निर्माण के लिए अधिग्रहित किया था।
जमीन पर निर्माण होने के बावजूद इसकी मूल भू-स्वामिनी इंद्राणी देवी और उनकी उत्तराधिकारी मीरा कुमार को मुआवजा नहीं मिला। बाद में जिलाधिकारी ने जमीन की जमाबंदी रद्द कर उसे गैरमजरुआ आम घोषित कर दिया था।
1941 की बंदोबस्ती रद्द करने पर अदालत ने उठाए सवाल
हाई कोर्ट ने बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धाराओं 3 और 4(ह) की व्याख्या करते हुए कहा कि धारा 4(ह) के तहत कार्रवाई करने से पहले यह साबित करना जरूरी है कि संबंधित संपत्ति कानूनी रूप से राज्य में निहित हो चुकी है। अदालत के अनुसार, राज्य सरकार इस संबंध में कोई अधिसूचना पेश नहीं कर सकी।
अदालत ने यह भी पाया कि तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन की मूल बंदोबस्ती वर्ष 1941 में हुई थी। जबकि धारा 4(ह) एक जनवरी 1946 के बाद हुए हस्तांतरण या बंदोबस्ती पर लागू होती है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दशकों पुरानी जमाबंदी और राजस्व अभिलेखों में दर्ज प्रविष्टियों को संक्षिप्त प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए रद्द नहीं किया जा सकता।
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