सिद्धारमैया स्टिंग केस में नया खुलासा, दिल्ली के करोल बाग से खरीदा गया था मोबाइल

HIGHLIGHTS
- मोबाइल खरीदने में रितेश पांडे और विनोद शर्मा दोनों शामिल थे।
- फोन दिल्ली के करोल बाग की एक दुकान से खरीदा गया था।
- रितेश पांडे को 24 अक्तूबर को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था।
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को निशाना बनाकर किए गए कथित स्टिंग ऑपरेशन में इस्तेमाल मोबाइल फोन दिल्ली से खरीदा गया था। इसके बाद राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के सरकारी आवास पर यह फोन प्रज्वल प्रसाद को दिया गया था। बंगलूरू के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने रविवार को यह जानकारी दी।
पुलिस आयुक्त के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी रितेश पांडे ने अपने बयान में बताया है कि प्रज्वल प्रसाद के निर्देश पर उसे मोबाइल फोन सौंपा गया था।
दिल्ली निवासी रितेश पांडे को 24 अक्तूबर को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस पर कथित स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करने का आरोप है। मामले में गिरफ्तार होने वाला वह पहला आरोपी है। बंगलूरू पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) ने उसे दिल्ली से पकड़ा था। पूछताछ के लिए उसे बंगलूरू लाया गया।
दिल्ली के करोल बाग से खरीदा गया था फोन
पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने बताया कि रितेश पांडे और विनोद शर्मा ने मिलकर मोबाइल फोन खरीदा था। दोनों ने दिल्ली के करोल बाग स्थित एक दुकान से फोन लिया और बाद में उसे प्रज्वल प्रसाद को सौंप दिया। यह फोन कुमारस्वामी के सरकारी आवास पर दिया गया था।
सितंबर में यूट्यूब पर दो वीडियो अपलोड किए गए थे। इन वीडियो में सिद्धारमैया पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। बताया गया था कि ये कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े हैं। इसके बाद कांग्रेस नेता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और एक आदेश हासिल किया, जिसके तहत मीडिया को इन वीडियो के बारे में खबरें प्रकाशित करने से रोक दिया गया।
सिद्धारमैया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर मामले की जांच की मांग भी की थी। इसके बाद सीसीबी पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया। पुलिस की कई टीमें कथित स्टिंग ऑपरेशन के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं।
आरोपियों की तलाश में पुलिस
पुलिस आयुक्त सिंह के अनुसार, जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर विनोद शर्मा और प्रज्वल प्रसाद को नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, दोनों फरार हैं और उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए अदालत में आवेदन भी किया है।
सिंह ने बताया कि पुलिस को रितेश पांडे और प्रज्वल प्रसाद के बीच कुछ वित्तीय लेनदेन की जानकारी मिली है। इनकी जांच की जा रही है। जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य डिजिटल और तकनीकी सबूत भी जुटाए हैं।
उन्होंने कहा कि तीनों लोग सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने का काम करते थे। जांच में उनके आपसी संबंधों, इस मामले में उनकी भूमिका और उनके बीच संपर्क कितने समय से था, इसकी पड़ताल की जा रही है।
क्या कुमारस्वामी को भी भेजा गया नोटिस?
पुलिस आयुक्त से पूछा गया कि क्या एचडी कुमारस्वामी को भी नोटिस जारी किया गया है और कथित स्टिंग ऑपरेशन में उनकी सीधी भूमिका सामने आई है। इस पर सिंह ने कहा कि जांच अभी चल रही है, इसलिए फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
उन्होंने कहा कि अभी केवल रितेश पांडे को गिरफ्तार किया गया है। पांडे ने अपने बयान में बताया है कि वह मोबाइल फोन लेकर आया था और प्रज्वल प्रसाद के निर्देश पर उसे सौंपा था। इस स्तर पर पुलिस किसी भी बात की निश्चित रूप से पुष्टि नहीं कर सकती।
सिंह ने दोहराया कि पांडे के बयान के अनुसार, फोन सौंपे जाने के समय प्रज्वल प्रसाद कुमारस्वामी के आवास पर मौजूद था। उन्होंने कहा कि बाकी दोनों आरोपियों का पता चलने और उनसे पूछताछ के बाद मामले में और जानकारी मिल सकेगी।
वायरल वीडियो को लेकर पुलिस ने क्या कहा था?
बंगलूरू पुलिस ने गुरुवार को इस मामले में दावा किया था कि सिद्धारमैया से जुड़े वायरल स्टिंग वीडियो में यौन शोषण के आरोप दिखाए गए थे। पुलिस ने इन्हें एक मनगढ़ंत कहानी का हिस्सा बताया था और कहा था कि यह कहानी जानबूझकर तैयार की गई थी।
राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भी जांच को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कथित स्टिंग ऑपरेशन की पड़ताल आगे बढ़ रही है और तकनीकी सबूतों की जांच के दौरान कई अहम सुराग मिले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली हो या किसी भी पद पर हो, उसे कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
खरगे ने कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत की। उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान में उनके हवाले से कहा गया कि सबूतों की तकनीकी जांच में कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं। जांच जारी है और आगे बढ़ने के साथ और जानकारियां सामने आएंगी। इसमें शामिल पाया जाने वाला कोई भी व्यक्ति कानूनी कार्रवाई से नहीं बच सकेगा।
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