दिल्ली-एनसीआर में भीषण ठंड और घना कोहरा, ट्रेनें-उड़ानें प्रभावित

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर शहरों में शुक्रवार सुबह भीषण ठंड के साथ घना कोहरा छाया रहा। हालात ऐसे रहे कि कई इलाकों में दृश्यता बेहद सीमित हो गई। तापमान में लगातार गिरावट के चलते पूरा क्षेत्र कड़ाके की सर्दी की चपेट में है।
सुबह के वक्त कोहरे ने बढ़ाई मुश्किलें
सुबह करीब छह बजे पालम इलाके में दृश्यता लगभग 800 मीटर और सफदरजंग में 700 मीटर दर्ज की गई। हालांकि, समय बढ़ने के साथ हालात और बिगड़ते गए। सात बजे पालम में विजिबिलिटी घटकर 350 मीटर रह गई, जबकि साढ़े सात बजे तक घना कोहरा छाने से दृश्यता महज 150 मीटर तक सिमट गई।
घने कोहरे का सीधा असर यातायात पर देखने को मिला। दिल्ली आने-जाने वाली कई ट्रेनें अपने तय समय से देरी से चलीं, वहीं कुछ उड़ानों पर भी असर पड़ा। हाईवे पर वाहन धीमी रफ्तार से चलते नजर आए और चालकों को फॉग लाइट व इंडिकेटर जलाकर सफर करना पड़ा।
ठंड के साथ प्रदूषण की दोहरी मार
दिल्ली-एनसीआर में ठंड और कोहरे के बीच प्रदूषण ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी। शुक्रवार सुबह राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 350 से ऊपर दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है।
16 जनवरी 2026: दिल्ली-एनसीआर में AQI की स्थिति
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आनंद विहार (दिल्ली): 354 – बहुत खराब
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आलीपुर (दिल्ली): 331 – बहुत खराब
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आया नगर (दिल्ली): 305 – बहुत खराब
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बवाना (दिल्ली): 363 – बहुत खराब
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बुराड़ी (दिल्ली): 325 – बहुत खराब
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चांदनी चौक (दिल्ली): 370 – बहुत खराब
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इंदिरापुरम (गाजियाबाद): 295 – खराब
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लोनी (गाजियाबाद): 410 – बेहद गंभीर
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वसुंधरा (गाजियाबाद): 409 – बेहद गंभीर
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नोएडा सेक्टर-125: 341 – बहुत खराब
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नोएडा सेक्टर-62: 330 – बहुत खराब
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गुरुग्राम: 330 – बहुत खराब
क्यों बढ़ी ठंड?
मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और लगातार हो रही बर्फबारी का असर मैदानी क्षेत्रों में साफ दिखाई दे रहा है। इसी कारण तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई है। अगले दो से तीन दिनों तक दिल्ली-एनसीआर में शीतलहर जैसी स्थिति बने रहने की संभावना है।
इस सीजन की सबसे सर्द सुबह
दिल्ली में इस सर्दी की सबसे ठंडी सुबह दर्ज की गई। सफदरजंग वेधशाला में न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो जनवरी 2023 के बाद सबसे कम है। वहीं पालम में पारा 2.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो वर्ष 2010 के बाद का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
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