नोएडा हिंसा में विदेशी फंडिंग का शक, नेपाल-पाक कनेक्शन की जांच तेज

नोएडा में 13 अप्रैल को वेतन वृद्धि को लेकर भड़की हिंसा मामले में पुलिस जांच में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि इस घटना के पीछे विदेशी फंडिंग और सुनियोजित साजिश हो सकती है, जिसमें नेपाल के रास्ते धन पहुंचाने की संभावना भी खंगाली जा रही है।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि मजदूर बिगुल दस्ता से जुड़े गिरफ्तार आरोपी सत्यम वर्मा का नेपाल आना-जाना रहा है। अब यह भी जांच का विषय है कि वह वहां कितनी बार गया और क्या उसके किसी अन्य देश से संपर्क थे।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या इस नेटवर्क का किसी अन्य देश, खासकर पाकिस्तान से कोई अप्रत्यक्ष संबंध हो सकता है। 13 अप्रैल की सुबह हिंसा के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर एक मीडिया हाउस से संपर्क कर नकारात्मक खबरें प्रसारित करने का दबाव बनाया था।
पुलिस का दावा है कि आरोपियों का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में अराजकता फैलाना, थानों पर हमला करना और उत्पादन कार्य को बाधित करना था, जिससे कंपनियों का संचालन प्रभावित हो सके।
छह आरोपियों की रिमांड पर पूछताछ जारी
मामले में पुलिस ने आदित्य आनंद समेत छह आरोपियों को रिमांड पर लेने के लिए अदालत में आवेदन दिया था। वहीं रूपेश को पांच दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। अदालत ने उसे तीन दिन की रिमांड मंजूर की है।
पुलिस मोबाइल चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से मिले साक्ष्यों की जांच कर रही है। ग्रुप में डाले गए ऑडियो संदेशों की भी पहचान की जा रही है।
देशभर के आंदोलनों से लिंक की जांच
जांच में यह भी सामने आया है कि आदित्य आनंद कई अन्य विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों से जुड़ा हुआ था, जिनमें गुरुग्राम, विजयवाड़ा, हरियाणा और अन्य राज्यों के आंदोलन शामिल हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विरोध प्रदर्शनों में भी उसकी भूमिका की जांच हो रही है।
साजिश के बड़े सवालों पर जांच
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कुछ ही समय में बने बड़े ग्रुप में सैकड़ों लोगों के डेटा की व्यवस्था कैसे हुई। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या श्रमिकों को भड़काने और हिंसा के लिए किसी सुनियोजित रणनीति के तहत ऑडियो और संदेश प्रसारित किए गए थे।
अधिकारियों के अनुसार, बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जा रही है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
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