ओवैसी के उभार से परेशान हैं ये कांग्रेसी नेता, पार्टी के खिलाफ खोला मोर्चा

कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। शशि थरूर की नाराजगी के बाद पार्टी के भीतर उठती आवाजें थमने का नाम नहीं ले रहीं। पहले बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने राहुल गांधी और पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए, अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने भी खुलकर असहमति जताई है।
राशिद अल्वी ने पार्टी को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस में मुस्लिम नेताओं को उचित प्रतिनिधित्व और सम्मान नहीं मिला, तो देश में असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं का राजनीतिक प्रभाव और बढ़ेगा। उन्होंने इसे पार्टी के लिए गंभीर संकेत बताया।
पार्टी में संवाद की कमी बड़ी समस्या
शकील अहमद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राशिद अल्वी ने कहा कि कांग्रेस में संवाद का अभाव एक बड़ी चुनौती बन चुका है। उन्होंने कहा कि पार्टी में ऐसा कोई मंच नहीं है, जहां नेता खुलकर अपनी बात रख सकें।
अल्वी के अनुसार, “पार्टी के भीतर चर्चा और संवाद की कमी है। हाईकमान तक अपनी बात पहुंचाना आसान नहीं है। यही कारण है कि असंतोष बढ़ रहा है।”
उन्होंने साफ कहा कि यदि पार्टी में आंतरिक संवाद को मजबूत नहीं किया गया, तो यह कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
राहुल गांधी पर भी उठे सवाल
इससे पहले शकील अहमद ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि जैसे कुछ देशों में राजा का आदेश ही कानून होता है, उसी तरह कांग्रेस में भी जो राहुल गांधी कहते हैं, वही अंतिम माना जाता है।
शकील अहमद का यह भी कहना था कि जहां सोनिया गांधी सभी नेताओं से नियमित संवाद रखती थीं, वहीं राहुल गांधी से मिलना नेताओं के लिए मुश्किल हो गया है।
मुस्लिम नेताओं की अनदेखी का आरोप
राशिद अल्वी ने पार्टी पर मुस्लिम नेतृत्व को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई मुस्लिम नेता कांग्रेस छोड़ चुके हैं, लेकिन किसी ने भी भाजपा का रुख नहीं किया।
अल्वी के मुताबिक, मुस्लिम नेताओं ने सत्ता के लालच में पार्टी नहीं छोड़ी, बल्कि उन्हें नजरअंदाज किए जाने की वजह से यह कदम उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस ने समय रहते इस स्थिति को नहीं संभाला, तो ओवैसी जैसे नेता और मजबूत होते जाएंगे, जो पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकते हैं।
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