फॉर्म-7 को लेकर अखिलेश का आरोप, बोले- अल्पसंख्यकों के वोट काटने की साजिश

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर मतदाता सूची में हेरफेर का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 के जरिए पीडीए वर्ग, विशेषकर अल्पसंख्यकों के वोट जानबूझकर हटाने की साजिश रची जा रही है। इस मामले में सपा ने चुनाव आयोग को कई लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने दावा किया कि सरकार में तैनात एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को फोन कर सपा समर्थक मतदाताओं, खासकर अल्पसंख्यकों के नाम सूची से हटाने का दबाव बना रहा है। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग ऐसी धांधली नहीं रोक पा रहा है, तो उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
फॉर्म-7 प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से मांग की कि डाउनलोड किए गए फॉर्म-7 का कड़ा सत्यापन किया जाए। उन्होंने कहा कि हर फॉर्म पर यूनिक नंबर होना चाहिए और कागजी फॉर्म-7 पर निर्वाचन आयोग का होलोग्राम अनिवार्य किया जाए। साथ ही अब तक जमा किए गए फॉर्म-7 पर किए गए हस्ताक्षरों की न्यायिक जांच कराने की भी मांग की गई।
उन्होंने कहा कि फॉर्म जमा करते समय की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित की जाए और यदि किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर धोखाधड़ी और राज्य के खिलाफ साजिश की धाराओं में कार्रवाई होनी चाहिए। अखिलेश ने आरोप लगाया कि पेन-ड्राइव के जरिए चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों में वोट काटने की सूचियां भेजी जा रही हैं।
कृषि बाजार खोलने पर भी केंद्र पर निशाना
इस दौरान अखिलेश यादव ने भारत के कृषि बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलने के फैसले पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि इससे देश के किसानों को भारी नुकसान होगा। उनका आरोप है कि इससे भारतीय खेती और किसानों की आय पर दबाव बढ़ेगा और छोटे किसान अपनी जमीन बेचने को मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने केंद्र पर आत्मनिर्भरता और स्वदेशी के दावों से पीछे हटने का आरोप भी लगाया।
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