अनुप्रिया पटेल के सामने आशीष पटेल का तंज- 'सामान किसी का, क्रेडिट किसी और का', यही नेतागिरी है

HIGHLIGHTS
- जीआईसी मैदान में डॉ. सोनेलाल पटेल के परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित हुआ कार्यक्रम।
- अनुप्रिया पटेल को डॉ. सोनेलाल पटेल और गौतम बुद्ध की प्रतिमाएं भेंट की गईं।
- राजू सेठ द्वारा बनवाई गई प्रतिमा को लेकर मंच पर हुआ मजाकिया संवाद।
प्रतापगढ़। डॉ. सोनेलाल पटेल के परिनिर्वाण दिवस पर जीआईसी मैदान में आयोजित कार्यक्रम के मंच पर विचारधारा से ज्यादा नेतागिरी के तौर-तरीकों की चर्चा रही। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल कार्यक्रम में अतिथि के रूप में मौजूद थीं, लेकिन सुर्खियां कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल के अंदाज ने बटोरीं। स्वागत-सम्मान के दौरान मंच पर कुछ ऐसा हुआ कि वहां मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे।
सबसे पहले विश्वनाथगंज के विधायक जीतलाल पटेल की पत्नी मिथलेश पटेल अपने समर्थकों के साथ मंच पर पहुंचीं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल को डॉ. सोनेलाल पटेल की प्रतिमा भेंट की। इस दौरान तालियां बजीं और तस्वीरें भी खींची गईं।
इसके बाद मानधाता नगर पंचायत अध्यक्ष इंद्रकली पटेल के बेटे आकाश पटेल उर्फ बादल गौतम बुद्ध की प्रतिमा लेकर मंच पर पहुंचे। अपना दल के नेता प्रज्ञा सिंह भी इसी तरह बुद्ध की प्रतिमा लेकर पहुंचे। देखते ही देखते मंच पर बुद्ध और डॉ. सोनेलाल पटेल की प्रतिमाएं नजर आने लगीं।
इसी बीच कार्यक्रम के संचालक ने माइक से बताया कि विधायक की पत्नी ने जो प्रतिमा भेंट की है, उसे रानीगंज विधानसभा अध्यक्ष राजू सेठ ने बनवाया है। यह सुनते ही आशीष पटेल ने माइक संभाल लिया। विधायक जीतलाल पटेल की ओर देखते हुए उन्होंने हंसकर कहा, 'विधायक जी, असल नेता तो आप ही हैं। दूसरे का सामान उठाकर दे देना ही तो नेतागिरी है।'
मंत्री की इस टिप्पणी पर पंडाल में ठहाके गूंज उठे। विधायक जीतलाल पटेल भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। वहीं, राजू सेठ चर्चा में आ गए। प्रतिमा उन्होंने बनवाई थी, लेकिन मंच पर उसका श्रेय विधायक की पत्नी को मिल गया। इस तरह मंच पर ही सेठ के हाथ से क्रेडिट निकल गया।
कुर्सी का मोह और बादल को मंच पर बुलाने की बात
कार्यक्रम में आशीष पटेल के मजाकिया अंदाज का सिलसिला यहीं नहीं थमा। आयोजन की तारीफ करते हुए उनकी नजर नीचे खड़े बादल पर पड़ी। उन्होंने बादल से कहा, 'बादल, नीचे क्यों खड़े हो, मंच पर आओ। लड़ाई तो कुर्सी की है और आप कुर्सी से भाग रहे हैं। जरा जीतलाल जी को देखो, जब से कार्यक्रम शुरू हुआ है कुर्सी ही नहीं छोड़ रहे। उन्हें पता है कुर्सी छिन सकती है।'
इस टिप्पणी के बाद एक बार फिर पंडाल में ठहाके और तालियां गूंजने लगीं। भारी-भरकम भाषणों के बीच मंत्री ने अपनी चुटीली बातों से अपना दल की राजनीति के दो पहलुओं की ओर इशारा किया—श्रेय कैसे हासिल किया जाए और कुर्सी कैसे बचाकर रखी जाए।
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