संगम पर अचला सप्तमी का उत्सव, 40-50 लाख श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था

प्रयागराज। अचला सप्तमी के पावन अवसर पर रविवार, 25 जनवरी को संगम सहित गंगा-यमुना के 24 से अधिक घाटों पर भारी भीड़ जुटने की संभावना है। मेला प्रशासन का अनुमान है कि इस दौरान लगभग 40 से 50 लाख श्रद्धालु आस्था के साथ स्नान करेंगे। वहीं, वसंत पंचमी पर आए श्रद्धालु अभी भी मेला क्षेत्र के शिविरों में ठहरे हुए हैं और अचला सप्तमी स्नान के बाद वापसी करेंगे।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए प्रशासन ने मेला क्षेत्र को सुबह चार बजे से नो व्हीकल जोन घोषित किया है। केवल आपातकालीन और एंबुलेंस वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अपने वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़ा करें।
मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और नेपाल सहित प्रदेश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। अचला सप्तमी पर भारी भीड़ के मद्देनजर पुलिस पूरी तरह से सक्रिय रहेगी। पांटून पुलों की विशेष व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालु आसानी से घाटों तक पहुँच सकें और स्नान के बाद सुरक्षित रूप से वापस लौट सकें।
अचला सप्तमी का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में माघ मास की सप्तमी को अचला सप्तमी के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। इस दिन सूर्यदेव की विधिवत पूजा की जाती है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और शास्त्रों के अनुसार इस व्रत में मसूर की दाल, गाजर या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ का सेवन वर्जित है।
शनिवार को संगम तट पर श्रद्धालुओं का विशाल जमावड़ा देखने को मिला। उन्होंने त्रिवेणी में स्नान और दीपदान कर आस्था प्रदर्शित की। हालांकि, कोहरे और धुंध के कारण सूर्यदेव का स्पष्ट दर्शन नहीं हो सका।
पांटून पुलों और पार्किंग की व्यवस्था
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पांटून पुल: श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए पुलों को विशेष रूप से आरक्षित किया गया है।
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पार्किंग स्थल: प्लॉट नंबर-17, गल्ला मंडी, नागवासुकि, ओल्ड जीटी कछार, टीकरमाफी महुआबाग, सोहम आश्रम, देवरख कछार और गजिया पार्किंग जैसी जगहों पर वाहन पार्क कर श्रद्धालु पैदल घाटों तक पहुंच सकेंगे।
प्रशासन ने मार्ग और पुलों के माध्यम से श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही और पार्किंग से घाटों तक पहुँचने की विस्तृत योजना बनाई है, ताकि भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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