पीएम-दक्ष योजना को लेकर कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला, जयराम रमेश बोले- ‘झोला उठाने का वक्त आ गया’

HIGHLIGHTS
- जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि योजना के लिए आवंटित बजट का पिछले वर्षों में इस्तेमाल नहीं हुआ।
- योजना के लाभार्थियों में अनुसूचित जाति, ओबीसी, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और सफाई कर्मचारी शामिल हैं।
- केंद्र की 16 अक्टूबर 2026 की राजपत्र अधिसूचना में योजना के तहत आधार आधारित सत्यापन के प्रावधान शामिल किए गए हैं।
कांग्रेस ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर पीएम-दक्ष योजना के क्रियान्वयन में कथित कमियों को लेकर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि जब सरकार प्रधानमंत्री के नाम से जुड़ी योजना को भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर पा रही है, तो उसे सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि मोदी सरकार की विदाई का समय करीब आ गया है और अब ‘झोला उठाने का वक्त आ गया है’।
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक मीडिया रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया। इस रिपोर्ट में ‘प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही’ (पीएम-दक्ष) योजना के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां होने का दावा किया गया था।
इस योजना का मकसद अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, विमुक्त और घुमंतू जनजातियों तथा सफाई कर्मचारियों सहित लक्षित समूहों को कौशल प्रशिक्षण देना है, ताकि उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकें।
जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर लगाए आरोप
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर हिंदी में लिखा, “‘नाम बड़े और दर्शन छोटे!’” उन्होंने कहा कि योजना प्रधानमंत्री के नाम पर है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके परिणाम उनके दावों की तरह शून्य हैं।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार का ध्यान बड़े-बड़े विज्ञापन देने, सुर्खियों को अपने मुताबिक संभालने और जमीन पर काम नहीं करने पर केंद्रित है।
रमेश के मुताबिक, पीएम-दक्ष योजना को दो साल तक लागू नहीं किया जाना और बीते वर्षों में आवंटित बजट का इस्तेमाल नहीं होना सरकार की एक और बड़ी नाकामी है। उन्होंने दावा किया कि वंचित वर्गों को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना को केंद्र ने केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित कर दिया है।
कांग्रेस नेता बोले- सरकार ने लोगों का भरोसा खो दिया
जयराम रमेश ने कहा कि जो सरकार प्रधानमंत्री के नाम पर शुरू की गई योजना को भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर सकती और जिसके लिए बड़े-बड़े दावे किए गए थे, उसे सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा, “पीएम मोदी, आपकी सरकार ने लोगों का भरोसा खो दिया है। इसकी विदाई की तारीख करीब है। ‘झोला उठाने का वक्त आ गया है’।”
रमेश ने यह भी सवाल उठाया कि मोदी सरकार आखिर कब तक जेन-जी के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती रहेगी। उन्होंने पूछा कि क्या 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के 240 सीटों पर सिमटने के बाद केंद्र सरकार अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और विमुक्त, घुमंतू तथा अर्ध-घुमंतू जनजातियों से बदला ले रही है।
वित्त वर्ष 2020-21 में शुरू हुई थी पीएम-दक्ष योजना
पीएम-दक्ष केंद्र सरकार की केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे वित्त वर्ष 2020-21 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य लक्षित वर्गों को अच्छी गुणवत्ता वाले संस्थानों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण देना है, ताकि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे नौकरी हासिल कर सकें या स्वरोजगार शुरू कर सकें।
योजना के तहत अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, विमुक्त और घुमंतू जनजातियों तथा सफाई कर्मचारियों को लक्षित लाभार्थियों में शामिल किया गया है। इनमें कचरा बीनने वाले लोग भी आते हैं।
योजना में आधार आधारित सत्यापन के प्रावधान
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की 16 अक्टूबर 2026 की राजपत्र अधिसूचना में पीएम-दक्ष योजना के तहत आधार आधारित प्रमाणीकरण से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।
अधिसूचना में पहचान सत्यापन और नामांकन की प्रक्रिया के साथ उन परिस्थितियों में वैकल्पिक दस्तावेजों के इस्तेमाल का प्रावधान भी बताया गया है, जब आधार प्रमाणीकरण सफल नहीं हो पाता या किसी व्यक्ति को आधार नंबर आवंटित नहीं किया गया है।
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