दशहरा समारोह में पीएम मोदी ने बताए देश के तीन दुश्मन, बोले- इन्हें पहचानना होगा

HIGHLIGHTS
- पीएम मोदी ने दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में दशहरा समारोह में हिस्सा लिया।
- प्रधानमंत्री ने भगवान श्रीराम, माता जानकी और बजरंगबली को नमन किया।
- उन्होंने देशभर में रामलीलाओं को श्रीराम के आदर्शों से जुड़ी परंपरा बताया।
विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में आयोजित दशहरा समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम, माता जानकी और बजरंगबली को नमन करते हुए देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आज भारत के हर कोने, गांव और शहर में भगवान श्रीराम की भक्ति और उनके आदर्शों की गूंज सुनाई दे रही है। पूरा देश रामलीला के उत्साह में डूबा हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर में रामलीलाओं का आयोजन भगवान श्रीराम के आदर्शों और शिक्षाओं को जीवंत बनाए रखने की परंपरा का प्रतीक है। विजयादशमी का पर्व अत्याचार और आतंक के अंत का संदेश देता है। यह इस शाश्वत विश्वास को भी दर्शाता है कि अंत में सत्य की असत्य पर विजय होती है। इस दौरान पीएम मोदी ने देश के तीन दुश्मनों का भी जिक्र किया।
'आज भारत का कोना-कोना राममय'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देशभर में रामलीलाओं का मंचन, भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवित रखने की परंपरा, अत्याचार और आतंक के अंत का उद्घोष तथा असत्य पर सत्य की विजय का विश्वास, ये सब केवल त्योहार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत की प्राण ऊर्जा हैं।
उन्होंने कहा कि देश, इसकी संस्कृति और पूर्वजों ने हजारों वर्षों से भगवान श्रीराम की उपासना की है। यह आस्था केवल इसलिए नहीं है कि श्रीराम ने राक्षसराज रावण का अंत किया था, बल्कि इसलिए भी है कि उन्होंने मानवता के इतिहास में अतुलनीय आदर्श स्थापित किए।
पीएम मोदी ने बताए देश के तीन दुश्मन
दशहरा समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी के विचार समान हों और राष्ट्र की संस्थाएं तथा राजनीतिक दल देशहित में एक साथ खड़े हों। उन्होंने कहा कि देश को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें, समाज को बांटने वाले लोग और भारतीय संस्कृति से नफरत करने वाली मानसिकता देश के दुश्मन हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि रामराज्य का अर्थ सभी को न्याय मिलना है और सत्ता का उद्देश्य जनकल्याण होना चाहिए। समाज को बांटने वालों को पहचानना जरूरी है। उन्होंने सभी से देश के दुश्मनों और बुराइयों के खिलाफ मिलकर लड़ने का आह्वान किया। उन्होंने दोहराया कि यह आयोजन केवल त्योहार नहीं, बल्कि भारत की प्राण ऊर्जा है।
'श्रीराम ने हर परिस्थिति में धर्म और सत्य का पालन किया'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भगवान श्रीराम न तो राजा बनने की संभावना से अत्यधिक प्रसन्न हुए और न ही वनवास मिलने पर दुखी हुए। तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने धर्म का पालन किया और सत्य की स्थापना की। उनका जीवन यह सीख देता है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, व्यक्ति को अपने कर्तव्यों और सिद्धांतों से पीछे नहीं हटना चाहिए।
'संकट में अपनी शक्ति और संसाधनों पर करें भरोसा'
पीएम मोदी ने कहा कि भगवान श्रीराम के जीवन से यह सीख मिलती है कि संकट कितना भी बड़ा हो और चुनौती कितनी भी कठिन, दूसरों के भरोसे बैठकर इंतजार नहीं करना चाहिए। अपनी शक्ति को पहचानना, संसाधनों पर विश्वास रखना, संकल्प को ताकत में बदलना और कड़ी मेहनत से समस्याओं का समाधान खोजना जरूरी है।
'विकसित भारत और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के साथ बढ़ें आगे'
प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम ने सिखाया कि रास्ते की कठिनाइयां हमारी यात्रा को रोक नहीं सकतीं। भारत को भी इसी मंत्र के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने जोर दिया कि देश के सामने विकसित भारत का निर्माण करने और आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य है। इन उद्देश्यों को दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत के जरिए पूरा किया जा सकता है।
'गरीबों और वंचितों का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रामराज्य ऐसी शासन व्यवस्था का प्रतीक है, जहां किसी तरह का भेदभाव न हो, न्याय स्थापित हो और सभी को समान अवसर मिलें। ऐसी व्यवस्था में सत्ता का उद्देश्य केवल शासन करना नहीं, बल्कि जनकल्याण सुनिश्चित करना होता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि गरीबों, वंचितों और समाज के कमजोर वर्गों की सेवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए।
'हमें अपनी क्षमता को पहचानना होगा'
भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट कितना भी बड़ा हो और चुनौती कितनी भी कठिन, दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी क्षमता को पहचानना चाहिए। अपने संसाधनों पर भरोसा रखते हुए दृढ़ संकल्प को ताकत में बदलना और परिश्रम से समस्याओं का समाधान खोजना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारत को भी इसी सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य हासिल करने के लिए जनकल्याण, समानता, आत्मविश्वास, स्वावलंबन और सामूहिक प्रयासों को मार्गदर्शक बनाना होगा।
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