भारतीय चिंतन आधारित शिक्षा पर फोकस, केंद्र तैयार कर रहा 2035 का रोडमैप

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2035 तक देश की शिक्षा व्यवस्था को मैकाले-प्रेरित औपनिवेशिक सोच से मुक्त करने की घोषणा के बाद केंद्र सरकार इस दिशा में तेज़ी से पहल में जुट गई है। इसी क्रम में शिक्षा मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय संयुक्त रूप से एक व्यापक रोडमैप तैयार कर रहे हैं, जिसके माध्यम से आने वाली पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों से गहराई से जोड़ा जाएगा।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू होने के बाद कई पहलें पहले ही शुरू हो चुकी हैं। स्कूली स्तर पर नई पाठ्यपुस्तकों का निर्माण जारी है और कई कक्षाओं में नए ढांचे को लागू भी किया जा चुका है। हालांकि, राज्यों में इसकी कार्यान्वयन गति असमान है, जिसे देखते हुए केंद्र अब समयबद्ध लक्ष्य तय करने पर विचार कर रहा है।
मुख्य सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन
इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 26 से 28 दिसंबर तक सभी राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठक बुलाई है। दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन में ‘विकसित भारत’ और ‘मानव पूंजी’ जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। बैठक में स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास, कृषि शिक्षा और खेलकूद जैसे क्षेत्रों पर बिंदुवार विचार-विमर्श किया जाएगा।
इन सत्रों में भारतीय ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा देने, भारतीय खेलों को प्रोत्साहित करने और स्थानीय संस्कृति को शिक्षा से जोड़ने जैसे मुद्दे भी शामिल रहेंगे। राज्य सरकारों के सामने आ रही संभावित बाधाओं और उनके समाधान पर भी चर्चा होगी।
एनईपी के पांच साल, राज्यों की प्रगति की समीक्षा
शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि 2020 में लागू हुई एनईपी की अधिकांश सिफारिशों पर अब तक अमल शुरू हो चुका है। ऐसे में यह समीक्षा आवश्यक है कि राज्यों ने नई नीति को किन स्तरों पर अपनाया और कहां कमियां रह गईं।
संस्कृति मंत्रालय का विशेष अभियान
साथ ही, संस्कृति मंत्रालय भी भारतीय विरासत को संरक्षित करने और संस्कृति व कला के प्रति जनभागीदारी बढ़ाने के लिए एक बड़े राष्ट्रीय अभियान की तैयारी कर रहा है।
एनईपी के अंतर्गत बालवाटिका से आठवीं तक की नई पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा चुकी हैं। शिक्षा मंत्रालय ने 2026–27 के शैक्षणिक सत्र से नौवीं से बारहवीं तक नई पुस्तकों को लागू करने का लक्ष्य रखा है।
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