हरिद्वार: उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी नार्को टेस्ट से अलग, SSP ने बताई वजह

HIGHLIGHTS
- हरिद्वार जिला एवं सत्र न्यायालय ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
- मामले में बीएनएस की धारा 308(5), 308(7), 79, 356(3), 356(2) और अन्य संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
- एसएसपी के मुताबिक, नार्को टेस्ट के लिए संबंधित व्यक्ति की सहमति और न्यायालय का आदेश जरूरी है।
उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी को अंकिता भंडारी हत्याकांड में नार्को टेस्ट से बचाने की कार्रवाई बताने वाली सोशल मीडिया पोस्ट को हरिद्वार पुलिस ने भ्रामक करार दिया है। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने स्पष्ट किया कि उर्मिला सनावर को रानीपुर कोतवाली में दर्ज एक अलग प्राथमिकी के मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच या नार्को टेस्ट की प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है।
मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान एसएसपी ने बताया कि उर्मिला सनावर के खिलाफ रानीपुर कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308(5), 308(7), 79, 356(3), 356(2) और स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4/10 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि इस मामले में बीएनएस की धारा 308 की उपधाराएं पांच और सात महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, मामले में सेशन ट्रायल का प्रावधान होने के कारण गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।
एसएसपी ने बताया कि 24 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस टीम को सहारनपुर भेजा गया था। पुलिस टीम ने उर्मिला सनावर को उनके घर से गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें हरिद्वार जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में नार्को टेस्ट का मामला अलग है और इसकी जांच दूसरी एजेंसी कर रही है। संबंधित जांच एजेंसी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद नार्को टेस्ट करा सकती है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति की सहमति और न्यायालय का आदेश आवश्यक है।
न्यायालय के आदेश पर नार्को टेस्ट के लिए भेजा जाएगा
एसएसपी के अनुसार, न्यायालय का आदेश रोशनाबाद जिला कारागार पहुंचने पर महिला पुलिसकर्मियों के साथ उर्मिला सनावर को नार्को टेस्ट के लिए भेज दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ एक मामले में कार्रवाई होने से दूसरे मामले की जांच प्रभावित नहीं होती।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति किसी मामले में वादी, गवाह, पीड़ित या आरोपी है और उसके खिलाफ किसी अन्य मामले में प्राथमिकी दर्ज होती है, तो दोनों मामलों की कानूनी प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से चलती है। ऐसे में उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी को नार्को टेस्ट से जोड़कर देखना सही नहीं है।
उर्मिला सनावर के खिलाफ पहले से दर्ज हैं नौ मामले
एक सवाल के जवाब में एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि उर्मिला सनावर के खिलाफ पहले से नौ मामले दर्ज हैं। रानीपुर कोतवाली में दर्ज प्राथमिकी उनके खिलाफ दसवां मामला है।
वर्ष 2025 में दर्ज एक अन्य प्राथमिकी में गिरफ्तारी नहीं होने के सवाल पर एसएसपी ने बताया कि उस मामले में बीएनएस की धारा 308(2) लगाई गई थी, जबकि वर्तमान मामले में धारा 308(5) और 308(7) के तहत कार्रवाई की गई है। उनके अनुसार, दोनों मामलों में धाराओं और कानूनी प्रावधानों का अंतर है। वर्तमान मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उर्मिला सनावर को गिरफ्तार किया।






























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