अमेरिका-चीन की नई नीतियों से वैश्विक संतुलन डगमगाया: जयशंकर

कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वर्तमान अंतरराष्ट्रीय हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था एक ऐसे परिवर्तनशील दौर से गुजर रही है, जहाँ अमेरिका और चीन की नई नीतियों ने पुरानी व्यवस्था की स्थिरता को चुनौती दी है।
जयशंकर के अनुसार, तेजी से बदलते भू-राजनीतिक माहौल में देशों के लिए यह तय करना कठिन हो गया है कि वे प्रतिस्पर्धा पर ध्यान दें या पर्दे के पीछे चलने वाले कूटनीतिक समझौतों को प्राथमिकता दें।
अमेरिका-चीन के बदलते रुख से बढ़ी अनिश्चितता
विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका अब पहले की तरह वैश्विक नेतृत्व की पारंपरिक भूमिका में नहीं है, बल्कि विभिन्न देशों के साथ एक-एक कर नई शर्तों पर बातचीत कर रहा है। वहीं, चीन भी अपनी नीतियों में पहले से अधिक सख्ती दिखा रहा है। इन परिस्थितियों के बीच कई देश खुद को दुविधा में पा रहे हैं और संभावित जोखिमों से बचने के लिए सभी विकल्प खुले रख रहे हैं।
भू-राजनीतिक दबाव और नई रणनीतियों की तलाश
उन्होंने बताया कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन की असुरक्षा और बदलते वैश्वीकरण मॉडल के कारण देश हर परिस्थिति के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। जहां कठिन निर्णयों से बचाव संभव है, वहां नरमी बरती जा रही है; जबकि संभावित लाभ दिखने पर त्वरित फैसले किए जा रहे हैं। इसी प्रवृत्ति के चलते दुनिया के कई हिस्सों में मुक्त व्यापार समझौतों के प्रति रुचि तेजी से बढ़ी है।
चीन में केंद्रित उत्पादन और सप्लाई चेन का जोखिम
जयशंकर ने कहा कि वर्तमान में वैश्विक उत्पादन का लगभग एक तिहाई हिस्सा चीन में केंद्रित है, जिससे सप्लाई चेन की विश्वसनीयता को लेकर सवाल और गहरा गए हैं। अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और जलवायु संकटों ने इन जोखिमों को और बढ़ा दिया है। ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया है—अमेरिका प्रमुख निर्यातक बन चुका है, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा में चीन की पकड़ मजबूत है। यह परिवर्तन वैश्विक संतुलन को प्रभावित कर रहा है।
व्यापार, मांग और वित्तीय ढांचे में उथल-पुथल
विदेश मंत्री ने व्यापार में अनिश्चित मांग, सप्लाई बाधाओं और टैरिफ में उतार-चढ़ाव को अंतरराष्ट्रीय व्यापार की अस्थिरता का बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र में प्रतिबंधों के बढ़ते उपयोग, संपत्तियों की जब्ती और ब्लॉकचेन तकनीक के विस्तार से एक नए वैश्विक वित्तीय ढांचे के संकेत मिल रहे हैं।
देशों का भविष्य-केन्द्रित दृष्टिकोण
जयशंकर ने कहा कि दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां हर राष्ट्र अपनी सुरक्षा, आर्थिक प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक रणनीतियों को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। अमेरिका और चीन दोनों के साथ समानांतर संवाद चलाते हुए देश ऐसे विकल्प भी तलाश रहे हैं, जो किसी भी संभावित संकट की स्थिति में सुरक्षा दे सकें।
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