राम्या ने कुत्तों के मूड पर कोर्ट की बात पर किया कटाक्ष, पुरुषों से की तुलना

अभिनेत्री और राजनीतिज्ञ दिव्या स्पंदना, जिन्हें राम्या के नाम से भी जाना जाता है, ने सुप्रीम कोर्ट की हालिया सुनवाई में आवारा कुत्तों को लेकर आई टिप्पणी पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। राम्या ने कोर्ट की टिप्पणी का मज़ाक उड़ाते हुए इसे पुरुषों के व्यवहार से तुलना की।
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ – जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया – पिछले साल नवंबर से जारी आवारा कुत्तों और मवेशियों के मामलों की सुनवाई कर रही है। बुधवार को पीठ ने कहा कि किसी कुत्ते के मूड को पहले से समझ पाना संभव नहीं है। यह टिप्पणी उन लोगों की दलीलों के जवाब में आई, जिन्होंने सड़क पर आवारा कुत्तों की समस्या पर कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि मामला सिर्फ काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों में डर पैदा करने वाले पहलू भी हैं। “आप यह कैसे पहचानेंगे कि कौन सा कुत्ता किस मूड में है?” उन्होंने सवाल किया। अदालत ने पिछले साल निर्देश दिया था कि अस्पताल, स्कूल, खेल परिसर, बस अड्डे और रेलवे स्टेशनों जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। इसके बाद उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद तय आश्रय गृहों में भेजा जाना चाहिए।
राम्या ने इस टिप्पणी पर इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, “किसी आदमी का दिमाग भी नहीं पढ़ा जा सकता। पता नहीं कब वह दुष्कर्म या हत्या कर दे, तो क्या सभी पुरुषों को जेल में डाल दिया जाए?” राम्या समाजिक मुद्दों पर अक्सर अपनी राय खुलकर रखती हैं और यह पहला मौका नहीं है जब उनके बयान विवादों में आए हों।
उन्होंने पहले रेणुकास्वामी हत्याकांड पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। उनकी टिप्पणी के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर दुष्कर्म और जान से मारने की धमकियां मिलीं। उन्होंने 43 खातों के खिलाफ बंगलूरू पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया।
देशभर में आवारा कुत्तों का मुद्दा पिछले साल से विवादों का कारण बना हुआ है। हाल ही में, दिल्ली के जंतर-मंतर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरोध में सैकड़ों लोग जमा हुए थे। इन प्रदर्शनों में संगीतकार मोहित चौहान और राहुल राम भी मौजूद रहे।
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