यूपी कांग्रेस: जिलाध्यक्षों के बदलाव की तैयारी, 75 पर्यवेक्षक नियुक्त

उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में व्यापक बदलाव किए जाने वाले हैं। इस प्रक्रिया की शुरुआत जिलाध्यक्षों के चयन से होगी। इसके लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपान ने प्रदेश के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए हैं। ये पर्यवेक्षक न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि बिहार, गोवा, नागालैंड, मणिपुर और मेघालय में भी संगठन सृजन अभियान की देखरेख करेंगे।
उत्तर प्रदेश में 75 पर्यवेक्षक जिलाध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया को अंजाम देंगे। इसमें अमी याग्निक, कुलदीप इंदौरा, संजना जाटव, मोहन मार्कम और सुभाष चोपड़ा जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी ने कांग्रेस छोड़ी, 73 समर्थक साथ
विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी ने शनिवार को अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे में 73 नेताओं के नाम शामिल हैं, जिनमें पूर्व विधायक फरहत हसन उर्फ हाजी शब्बन, पूर्व विधायक राम जियावन और पूर्व एमएलसी हुस्ना सिद्दकी भी हैं।
नसीमुद्दीन सिद्दकी ने बताया कि कांग्रेस के किसी नेता से उनकी व्यक्तिगत शिकायत नहीं है। वह दलितों और अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए कांग्रेस में आए थे, लेकिन वर्तमान हालात में उत्तर प्रदेश कांग्रेस में फासीवादी ताकतों के खिलाफ प्रभावी संघर्ष देखने को नहीं मिल रहा। ऐसे में उन्होंने अपने समर्थकों के साथ अलग राह चुनने का निर्णय लिया है। उन्होंने संकेत दिया कि अगले सप्ताह वे नई रणनीति का खुलासा करेंगे।
सियासी पृष्ठभूमि और आगे की संभावनाएं
नसीमुद्दीन सिद्दकी ने 1988 में बांदा नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया। 1991 में बसपा से विधायक बने और बाद में बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। बसपा प्रमुख मायावती से मतभेद के बाद उन्होंने फरवरी 2018 में कांग्रेस जॉइन की और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई।
वर्तमान में उन्होंने किसी पार्टी के साथ जुड़ने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि वह आजाद समाज पार्टी के साथ नई शुरुआत कर सकते हैं। पार्टी अध्यक्ष चंद्रशेखर के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन उनकी भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा वह प्रदेश के अन्य विपक्षी दलों के साथ भी संभावित सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं।
पूर्व मंत्री का कहना है कि उनका अंतिम निर्णय इस आधार पर होगा कि वह दलितों और अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा कर सके और बाबा साहब भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के सपनों को साकार करने का अवसर मिले।
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