फ्रांस में तीसरे सप्ताह भी सड़कों पर उतरे युवा, 70 हजार पुलिसकर्मी तैनात

HIGHLIGHTS
- फ्रांस में स्कूलों की खराब इमारतों और शिक्षकों की कमी से शुरू हुआ आंदोलन अब कई मुद्दों पर केंद्रित हो गया है।
- छात्रों ने विश्वविद्यालयों में दाखिले की मौजूदा व्यवस्था को गरीब विद्यार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण बताया।
- 17 और 24 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, लूटपाट और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थीं।
फ्रांस में महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ रहे हैं। शनिवार को लगातार तीसरे सप्ताह हजारों युवा और अन्य प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। यह आंदोलन अब फ्रांस से आगे बढ़कर जर्मनी, इटली समेत यूरोप के कई देशों तक पहुंच गया है।
स्थिति को देखते हुए फ्रांस में करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों और जेंडरमेरी के जवानों की तैनाती की गई है। सरकार को आशंका है कि पहले की तरह इस बार भी हिंसा और तोड़फोड़ हो सकती है। खास तौर पर हैलोवीन की रात को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।
फ्रांस में लगातार तीसरे सप्ताह क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?
फ्रांस में आंदोलन की शुरुआत पिछले महीने स्कूलों की खराब इमारतों, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालयों में दाखिले की व्यवस्था के विरोध में हुई थी। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालयों में प्रवेश की मौजूदा व्यवस्था गरीब और कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव करती है।
बाद में श्रमिक संगठनों और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की नीतियों से नाराज अन्य समूह भी आंदोलन में शामिल हो गए। शनिवार को पेरिस के पूर्वी हिस्से पोर्टे डी बागनोले में हजारों प्रदर्शनकारी जुटे। मार्च की अगुवाई छात्रों को करनी थी। फ्रांस के प्रमुख श्रमिक संगठनों में शामिल सीजीटी के सुरक्षा स्वयंसेवक भी प्रदर्शनकारियों पर नजर रख रहे थे।
प्रदर्शनकारियों के बैनरों पर अलग-अलग मांगें लिखी थीं। कुछ शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे, जबकि अन्य ने महंगाई और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे उठाए।
70 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती क्यों?
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने प्रदर्शन के दौरान अव्यवस्था फैलने की आशंका जताई। उन्होंने खास तौर पर हैलोवीन की रात के बाद हिंसा का खतरा अधिक बताया।
इससे पहले 17 और 24 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान भीड़ के कुछ हिस्सों ने हिंसा, लूटपाट और तोड़फोड़ की थी। इन घटनाओं के बाद पुलिस ने हजारों लोगों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ उपद्रवी समूहों ने पुलिस पर पटाखे और अन्य चीजें फेंकी थीं।
पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछार और भीड़ को तितर-बितर करने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया था। इन कार्रवाइयों में कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। इस बार पेरिस में मार्च का रास्ता शहर के बाहरी हिस्से की ओर रखा गया, ताकि बाजारों और दुकानों को नुकसान से बचाया जा सके।
हिंसा रोकने के लिए क्या पाबंदियां लगाई गईं?
सरकार ने प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। पेरिस के प्लास द ला रिपब्लिक और लेस हॉल्स जैसे इलाकों में शनिवार और रविवार की रात 11 बजे से सुबह छह बजे तक प्रवेश पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा शांज-एलीजे इलाके में अकेले घूमने वाले नाबालिगों के लिए रात नौ बजे से कर्फ्यू लगाया गया है।
हालांकि, पेरिस की एक अदालत ने बुधवार को नाबालिगों पर लगाए गए पहले के कर्फ्यू को रद्द कर दिया था। अदालत ने इसे आने-जाने की आजादी में गंभीर और गैरकानूनी दखल माना था।
प्रदर्शन में शामिल 21 वर्षीय छात्र कोरेंटिन कैब्रू ने अपने छात्रावास की खराब हालत का जिक्र किया। उसने बताया कि दीवारों पर सीलन है, प्लास्टर उखड़ रहा है और परिसर में कॉकरोच तथा चूहे हैं। उसने उम्मीद जताई कि हैलोवीन के मौके पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण और उत्सव जैसा रहेगा।
जर्मनी और इटली में युवाओं ने क्यों शुरू किए प्रदर्शन?
फ्रांस के साथ जर्मनी में भी युवाओं ने प्रदर्शन का आह्वान किया है। 'जेन जी रेगेल्ट' नाम के युवा संगठन ने करीब 30 शहरों में प्रदर्शन करने की अपील की है। संगठन की मांगों में शिक्षा, स्वास्थ्य, जलवायु संरक्षण और जीवनयापन को सस्ता बनाना शामिल है। युवा सैन्य भर्ती दोबारा शुरू करने के विरोध में भी आवाज उठा रहे हैं।
आयोजकों के मुताबिक, ऑनलाइन 1.80 लाख से अधिक लोगों ने प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पंजीकरण कराया है। बर्लिन के ब्रांडेनबर्ग गेट पर करीब 10 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।
इटली के मिलान, ट्यूरिन और बोलोनिया में पहले हुई झड़पों के बाद पुलिस सतर्क है। बेल्जियम, नीदरलैंड, ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड और पुर्तगाल में भी सोशल मीडिया के जरिए प्रदर्शन की अपील की गई है।
स्पेन में भी प्रदर्शन की तैयारी, पुलिस अलर्ट पर
स्पेन के बार्सिलोना में भी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी की है। यहां कैटलन पुलिस ने सबसे ऊंचे स्तर का अलर्ट लागू करने की योजना बनाई है। सोशल मीडिया मंच टिकटॉक पर 'ब्लोकस' नाम के एक अज्ञात नेटवर्क ने नए प्रदर्शनों का आह्वान किया है।
इससे पहले शनिवार को हुए दंगों के दौरान करीब 130 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें अधिकतर नाबालिग थे। यूरोप के कई देशों में युवाओं के प्रदर्शन का दायरा बढ़ने से पुलिस और प्रशासन सतर्क हैं।
इन आंदोलनों में शिक्षा, रोजगार, महंगाई, स्वास्थ्य और जलवायु जैसे अलग-अलग मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन कुछ जगहों पर हुई हिंसा ने सरकारों की चिंता बढ़ा दी है।
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