JNU में 17 दिन बाद खत्म हुई भूख हड़ताल, पांच छात्र नेताओं का निष्कासन रद्द

HIGHLIGHTS
- छात्र संघ और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बैठक के बाद कई मांगों पर बनी सहमति।
- अदिति मिश्रा, के. गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली और नीतीश कुमार का निष्कासन रद्द।
- विरोध-प्रदर्शनों से संबंधित प्रॉक्टोरियल जांच वापस लेने का निर्णय।
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पिछले 17 दिनों से जारी छात्र संघ की भूख हड़ताल खत्म हो गई है। प्रशासन ने छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और प्रॉक्टोरियल जांच वापस लेने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही छात्र संघ के पांच पदाधिकारियों का निष्कासन भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है।
किन छात्रों का निष्कासन हुआ रद्द
छात्र प्रतिनिधियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच हुई बैठक में निष्कासन वापस लेने का फैसला किया गया। जिन छात्रों का निष्कासन रद्द हुआ है, उनमें छात्र संघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष के. गोपिका बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार शामिल हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन छात्रों को जुर्माने की राशि जल्द जमा करने की सलाह दी है। इन पांचों को पिछले साल 21 नवंबर को डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में तोड़फोड़ के मामले में निष्कासित किया गया था। उन पर बायोमीट्रिक फेस रिकॉग्नाइजेशन सिस्टम की मशीनें उखाड़ने का आरोप भी लगा था। प्रशासन ने फरवरी में यह कार्रवाई की थी।
इसके अलावा, विरोध-प्रदर्शनों के दौरान शुरू की गई प्रॉक्टोरियल जांच को भी वापस लेने का निर्णय लिया गया है। इन जांचों में निष्कासन और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के खिलाफ किए गए प्रदर्शनों से जुड़े मामले शामिल थे।
छात्रों की मांगों पर विचार के लिए गठित होंगी समितियां
छात्र संघ की आपत्तियों के बाद चीफ प्रॉक्टर कार्यालय (सीपीओ) के नियमों की समीक्षा के लिए एक समिति बनाई जाएगी। इसमें जेएनयू छात्र संघ का एक पदाधिकारी और एक निर्वाचित सदस्य शामिल होंगे। समिति विवादित प्रावधानों को हटाने की सिफारिश करेगी।
जेएनयू प्रवेश परीक्षा की समीक्षा के लिए भी छात्र संघ के प्रतिनिधि वाली समिति गठित की जाएगी। वहीं, समान अवसर प्रकोष्ठ (ईओसी) की ऑडिट रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का फैसला लिया गया है। छात्र संघ के पदाधिकारियों से परामर्श के बाद ईओसी का पुनर्गठन भी किया जाएगा।
छात्रावास की सुविधाओं और छात्रवृत्ति में सुधार पर सहमति
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मेरिट-कम-मीन्स (एमसीएम) छात्रवृत्ति में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर विचार करने की सहमति दी है। इसके अलावा, ताप्ती और माही-मांडवी छात्रावासों के साथ ट्रांसजेंडर एवं जेंडर इक्वैलिटी फैसिलिटेशन एरिया का संरचनात्मक ऑडिट कराया जाएगा। ऑडिट के बाद जरूरी मरम्मत का काम किया जाएगा।
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