ओंकारेश्वर में दो दिन बाद खुला बाजार, सिंहस्थ-2028 की मांगों पर प्रशासन ने मांगा एक माह का समय

HIGHLIGHTS
- प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे और रोजगार से जुड़े मुद्दे उठाए गए।
- नवीन बस स्टैंड के सामने वन भूमि पर प्लॉट देने की मांग स्वीकार नहीं हुई।
- महंत मंगलदास त्यागी महाराज ने विकास कार्यों में स्थानीय लोगों की सहमति को जरूरी बताया।
ओंकारेश्वर। सिंहस्थ-2028 के विकास कार्यों से प्रभावित स्थानीय निवासियों की 19 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले दो दिनों से बंद तीर्थनगरी ओंकारेश्वर मंगलवार शाम 5 बजे फिर से खुल गई। प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बीच हुई चर्चा के बाद मांगों पर विचार करने के लिए फिलहाल एक महीने का समय देने पर सहमति बनी है। इस दौरान विकास कार्यों में सामने आई विसंगतियों को दूर करने, प्रभावित क्षेत्रों का नए सिरे से सर्वे कराने और स्थानीय लोगों की सहमति से निर्माण कार्य आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
स्थानीय नागरिकों ने साफ किया कि वे सिंहस्थ-2028 के विकास कार्यों के खिलाफ नहीं हैं। उनकी मांग है कि विकास के साथ प्रभावित परिवारों के हितों, पुनर्वास, मुआवजे और आजीविका की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाए। लोगों का कहना है कि इससे पहले भी प्रशासन की ओर से आश्वासन दिए गए थे, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में इस बार एक महीने के भीतर ठोस कदम उठाने और स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की गई है।
नगर परिषद कार्यालय में हुई लंबी बैठक
मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे ओंकारेश्वर नगर परिषद कार्यालय में स्थानीय प्रतिनिधियों, संत-महंतों, जनप्रतिनिधियों, समिति सदस्यों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इसमें स्थानीय नागरिकों की 19 सूत्रीय मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में षट्दर्शन संत मंडल के अध्यक्ष महंत मंगलदास त्यागी महाराज, मांधाता विधायक नारायण पटेल, नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रकाश परिहार, ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक ट्रस्टी राजा राव पुष्पेंद्र सिंह, भाजपा नगर अध्यक्ष संतोष वर्मा, भाजपा नेता दिग्विजय सिंह तोमर और श्याम सिंह मौर्य, कांग्रेस नेता नारायण सिंह तोमर, नगर कांग्रेस अध्यक्ष चंपाबाई तथा कांग्रेस के पुनासा मंडल अध्यक्ष चंदू माहगल्या सहित अन्य जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
प्रशासन की ओर से ओंकारेश्वर की नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर श्रद्धा शुक्ला, पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा, नगर परिषद सीएमओ मोनिका पारधी, नायब तहसीलदार उदय मंडलोई और थाना प्रभारी अनोख सिंधिया सहित संबंधित अधिकारी बैठक में शामिल हुए। खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और पुलिस अधीक्षक अगम जैन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े।
कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने आश्वासन दिया कि अगले एक महीने तक ओंकारेश्वर में कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस अवधि में स्थानीय लोगों की मांगों और विकास कार्यों से जुड़ी विसंगतियों पर विचार किया जाएगा।
वन भूमि पर प्लॉट देने की मांग पर नहीं बनी सहमति
बैठक में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे, रोजगार और निर्माण कार्यों से संबंधित समस्याएं उठाई गईं। नवीन बस स्टैंड के सामने वन विभाग की जमीन पर प्रभावित परिवारों को प्लॉट देने की मांग भी रखी गई। हालांकि, कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने स्पष्ट किया कि वन भूमि पर प्लॉट उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
अन्य मांगों पर चर्चा के दौरान स्थानीय समिति के सदस्यों ने कहा कि पहले भी कुछ मांगों को लेकर लिखित आश्वासन दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों का नए सिरे से सर्वे कराने की मांग की गई, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आए और लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा सके।
'15 हजार लोगों का भविष्य कुछ लोग तय नहीं कर सकते'
बैठक में षट्दर्शन संत मंडल के अध्यक्ष महंत मंगलदास त्यागी महाराज ने कहा कि ओंकारेश्वर के करीब 15 हजार लोगों का भविष्य केवल समिति या नगर परिषद के कुछ लोग तय नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों से संबंधित निर्णयों में नगर के लोगों की व्यापक सहमति जरूरी है।
महंत मंगलदास त्यागी महाराज ने कहा कि स्थानीय नागरिक विकास के विरोध में नहीं हैं। उनकी मांग है कि सिंहस्थ-2028 के लिए होने वाले निर्माण कार्यों में प्रभावित परिवारों के हितों को प्राथमिकता दी जाए। जिन लोगों के घर, रोजगार या आजीविका पर असर पड़ने की आशंका है, उनके लिए पुनर्वास, मुआवजे और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।
हनुमान मंदिर में आमसभा के बाद बंद खत्म करने का निर्णय
प्रशासन के साथ बैठक के बाद मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे हनुमान मंदिर में स्थानीय नागरिकों की आमसभा हुई। इसमें प्रशासन के साथ हुई बातचीत और 19 सूत्रीय मांगों पर विचार किया गया।
आमसभा में शासन-प्रशासन को एक महीने का समय देने का फैसला लिया गया। इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों का दोबारा सर्वे कराने, विकास कार्यों से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने और मांगों पर आगे की कार्रवाई के लिए स्थानीय स्तर पर चर्चा की जाएगी।
प्रशासन की ओर से मिले आश्वासन के बाद स्थानीय नागरिकों ने बंद समाप्त करने का निर्णय लिया। मंगलवार शाम 5 बजे के बाद बाजार, दुकानें और अन्य गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं। हालांकि, आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया गया है और मांगों का अंतिम समाधान अभी नहीं हुआ है।
दो दिन बंद रहने से श्रद्धालुओं को हुई परेशानी
19 अक्टूबर से जारी बंद के चलते ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। बाजार, होटल और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहने के कारण बाहर से आए लोगों को जरूरी सामान जुटाने में दिक्कत हुई। कुछ श्रद्धालुओं को पीने के पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी परेशानी झेलनी पड़ी।
स्थानीय नागरिकों ने स्वीकार किया कि लगातार दो दिन बंद रहने से नगर की सामान्य व्यवस्था प्रभावित हुई और इसका असर श्रद्धालुओं पर भी पड़ा। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन से बातचीत के बाद बंद खत्म करने का फैसला लिया गया।
एक महीने बाद फिर तय होगी आंदोलन की रणनीति
ओंकारेश्वर में बंद समाप्त होने के बाद अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। अगले एक महीने के दौरान प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बीच मांगों के समाधान, प्रभावित परिवारों के सर्वे और निर्माण कार्यों की रूपरेखा पर चर्चा होने की उम्मीद है।
स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया है कि वे प्रशासन के साथ सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन यदि एक महीने के भीतर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे फिर से आंदोलन कर सकते हैं। दो दिन के बंद के बाद फिलहाल टकराव की स्थिति टल गई है, लेकिन 19 सूत्रीय मांगों का समाधान होना अभी बाकी है। अब सबकी नजर अगले एक महीने में होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई और स्थानीय नागरिकों के साथ बनने वाली सहमति पर रहेगी।






























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