'जवानी जवानी नहीं जिसकी कोई कहानी न हो', युवाओं से बोले राज्यवर्धन सिंह राठौड़

HIGHLIGHTS
- कार्यक्रम में पूर्व आईएएस संजय दीक्षित के साथ राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
- राठौड़ ने तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होने वाले आंदोलनों को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया।
- उन्होंने कहा कि देश के करीब 40 करोड़ युवा अलग-अलग क्षेत्रों में भारत की प्रगति में योगदान दे रहे हैं।
राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री और पूर्व ओलंपियन कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ शुक्रवार को एक कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के उद्घाटन के बाद पूर्व आईएएस संजय दीक्षित के साथ हुई चर्चा में उन्होंने कांग्रेस, राहुल गांधी, लोकतंत्र, SIR, सेना और खेल सहित कई मुद्दों पर अपनी राय रखी।
युवाओं को संबोधित करते हुए राठौड़ ने कहा, ‘वह जवानी जवानी नहीं जिसकी कोई कहानी न हो।’ उन्होंने युवाओं से पूछा कि वे अपनी जिंदगी की कहानी काली स्याही से लिखना चाहते हैं या सुनहरी स्याही से।
आंदोलन और आंदोलन के नाम पर होने वाली गतिविधियों में अंतर समझें युवा
राठौड़ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर व्यक्ति को विरोध और आंदोलन करने का अधिकार है। किसी जायज मुद्दे पर तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर किया गया आंदोलन लोकतंत्र को मजबूती देता है।
हालांकि, उन्होंने आंदोलन और उसके नाम पर होने वाली राजनीतिक गतिविधियों के बीच फर्क समझने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, युवाओं को यह पहचानना चाहिए कि किसी मुद्दे पर वास्तव में चिंता जताई जा रही है या किसी योजनाबद्ध मनोवैज्ञानिक अभियान के जरिए उन्हें प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।
सेना 140 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा के लिए तैनात रहती है
सेना की जिम्मेदारी पर बात करते हुए राठौड़ ने कहा कि देश का सैनिक 140 करोड़ लोगों की सुरक्षा के लिए सीमा पर तैनात रहता है और जरूरत पड़ने पर अपना बलिदान भी देता है। ऐसे में उसकी उम्मीद रहती है कि देश के नागरिक और खासकर राजनीतिक नेतृत्व उसके साथ खड़े रहें।
उन्होंने कहा कि कई बार सत्ता की राजनीति इतनी हावी हो जाती है कि सभी मर्यादाएं पार होती नजर आती हैं। राठौड़ ने बताया कि देश के करीब 40 करोड़ युवा अलग-अलग क्षेत्रों में भारत की प्रगति में योगदान दे रहे हैं। इनमें सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में काम करने वाले युवाओं के अलावा स्टार्टअप, तकनीक और शोध जैसे क्षेत्रों से जुड़े युवा भी शामिल हैं।
उन्होंने इन युवाओं को वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने की अहम ताकत बताया।
राहुल गांधी पर साधा निशाना, संसद को बताया चर्चा का सही मंच
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए राठौड़ ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना जरूरी है और सरकार जवाब देने के लिए तैयार है। लेकिन सवालों और मुद्दों पर चर्चा करने का सही मंच संसद है।
उन्होंने कहा कि अगर संसद में बहस नहीं होगी और हर मुद्दे को सड़क पर ले जाने की राजनीति की जाएगी, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।
SIR को लेकर कांग्रेस के विरोध पर राठौड़ ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी संवैधानिक रूप से चुनाव आयोग की है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि जब चुनाव परिणाम उसके पक्ष में आते हैं तो उसे चुनावी व्यवस्था सही लगती है, लेकिन भाजपा के पक्ष में नतीजे आने पर उसी व्यवस्था और लोकतंत्र पर सवाल उठाए जाते हैं।
खेल युवाओं में अनुशासन और संघर्ष की भावना पैदा करता है
खेलों के महत्व पर चर्चा करते हुए राठौड़ ने कहा कि खेल सिर्फ पदक हासिल करने का जरिया नहीं हैं। इनके जरिए युवाओं में अनुशासन, धैर्य, संघर्ष करने की क्षमता और टीम भावना विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि भविष्य के ओलंपिक खिलाड़ियों की पहचान कम उम्र में ही की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, 5 से 15 साल के बच्चों की प्रतिभा और शारीरिक क्षमता को पहचानकर उन्हें बेहतर खानपान, प्रशिक्षण, मेडिकल सहायता और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए।
चार साल तक नहीं मिला पदक, लेकिन जारी रखे प्रयास
अपने शूटिंग करियर का अनुभव साझा करते हुए राठौड़ ने बताया कि उन्होंने सेना में रहते हुए शूटिंग की शुरुआत की थी। शुरुआती चार साल तक उन्हें कोई पदक नहीं मिला। कई प्रतियोगिताओं में उनका स्थान 30वां या 40वां रहा, लेकिन उन्होंने अभ्यास और प्रयास जारी रखे।
उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि आलोचना से घबराने के बजाय उससे सीखना चाहिए और लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए। उनके अनुसार, असफलता के बाद भी कोशिश जारी रखना ही सफलता की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता है।
सोशल मीडिया के दौर में युवाओं को सतर्क रहने की सलाह
राठौड़ ने कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया के कारण आज युवाओं तक सूचनाएं बहुत तेजी से पहुंचती हैं। ऐसे में उन्हें यह समझना जरूरी है कि जानकारी देने वाला कौन है और कौन किसी विशेष उद्देश्य से उन्हें प्रभावित या मैन्युपुलेट करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत की तरक्की किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है। युवाओं को सकारात्मक सोच और ऊर्जा के साथ राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
राठौड़ ने फिर कहा कि जवानी की पहचान केवल जोश से नहीं होती, बल्कि उस जोश के दम पर लिखी गई कहानी से होती है।
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